April 21, 2021
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अभी-अभी उत्तरकाशी उत्तराखंड देहरादून समस्या

Video : तबाही की ये तस्वीरें डरा देंगी आपको।

गणेश रयाल

देहरादून /उत्तरकाशी : उत्तरकाशी गंगोत्री धाम से 28 किलोमीटर पहले बसा सुंदर कस्बा धराली में कल रात इस कदर भारी पड़ी कि जिन होटलों में कल तक यात्री रुकते थे वंहा मिट्टी पत्थरो ने अपना डेरा जमा दिया है । देर शाम धराली से लगी खीरागाड़ में ऐसी हलचल हुई कि लोग रात भर दहसत में दिखे। ग्रामीणों की माने तो ऊची पहाड़ी पर श्रीकंठ बुग्याल के आस पास बनी झील टूटने के कारण ऐसी स्थिति पैदा हुई। नदी अपने मूल जगह से हट के धराली बाजार की तरफ बह रही है। प्रसासन फिलहाल राहत की बात कर रहा हैं।

गंगोत्री धाम से 28किलोमीटर पहले सीमांत गांव धराली में उस समय दहशत का माहौल बन गया जब गांव के बीच में बहने वाले गदेरे खीरागाड़ में अचानक जल का स्तर बढ़ गया। अचानक बड़े जलस्तर के कारण खीरागाड़ के दोनों ओर रहने वाले ग्रामीण  लोग ने घरों से बाहर निकल भाग कर अपनी जान बचाई । शांत बहने वाली नदी ने ऐसा रौद्र रूप लिया कि पूरा शहर ही इसकी जद में आ गया ।

धराली बाजार और होटलों में  मिट्टी पत्थर समेत पानी घुस गया। लोग रात भर दहसत में रहे। नदी में आया सैलाब से हाइवे 50मीटर हिस्से में मिट्टी का पहाड़ खड़ा हो गया। लगभग 15 होटलों जिसमे कल तक यात्री रुकते थे वंहा मिट्टी पत्थर ने अपना आशियाना बना लिया। धराली की चक्की से लेकर बाजार की दुकानों को नुकसान उठाना पड़ा। वंही सेब के बगीचों को भी भारी नुकसान हुआ है।यंहा केदार मंदिर भी इस आपदा से बच नही पाया और भारी नुकसान हुआ है। नदी इस समय अपने मूल स्थान पर न बह कर बाजार की तरफ बह रही है जो एक और खतरे की और इशारा है।

प्रसाशन को इसकी सूचना मिलते ही जिलाधिकारी ने अधिकारियों मौके पर जाकर युद्ध स्तर पर कार्य करने के  निर्देश दिए । खुद भी जिलाधिकारी आशीष चोहान मौके के लिए रवाना हुए।

ग्रामीणों की माने तो श्रीकंठ बुग्याल के पास एक बुग्याल में कुछ दिन  पहले से  झील बनी थी जिस पर लगातार हलचल हो रही थी। झील  टूटने से खीरगाड़ में ये आया उफान। फिलहाल प्रसाशन ने गंगोत्री हाइवे खोल दिया गया है और नुकसान का आंकलन में प्रसासन लगा हुआ है।

जिस तरह ये घटनाकर्म कल घटा और इस समय जो हालात धराली में बने है उसने एक बार यंहा के लोगो को 2013 की याद दिला दी। उस समय भी यही हालात बने थे। नदी इस समय अपने मुख्य धारा से हटके बाजार की और बह रही है ऐसे में बारिश होती है तो और नुकसान गंगोत्री धाम के अंतिम यात्रा पड़ाव के  इस कस्बे को उठाना पड़ सकता है । जरूरत है आनन फानन में कार्य कर खीरागाड़ को अपने मूल स्थान पर बहने की। जंहा भारी मिट्टी पत्थर जमा हो गए है।

 

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