Home अभी-अभी साहित्य एवं कला उत्सव में करीब एक लाख लोग व सौ से...

साहित्य एवं कला उत्सव में करीब एक लाख लोग व सौ से अधिक संस्थान जुडेगे – डॉ० संजीव चोपड़ा

11
0
SHARE

कपिल मलिक

मसूरी : वैली ऑफ वर्डस् साहित्य एवं कला उत्सव के अध्यक्ष डॉ० संजीव चोपड़ा ने आगामी 20 से 22 नवंबर को होने वाले साहित्य व कला उत्सव के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि इस बार इस उत्सव में देश विदेश के एक लाख से अधिक साहित्य व कला प्रेमी जुडे़गे। क्यों कि वर्चुअल उत्सव के चलते अधिक से अधिक लोगों की भागीदारी रहेगी जबकि अन्य सालों में बीस से पच्चीस हजार लोग ही जुड़ पाते थे।

होटल सवाय में आयोजित पत्रकार वार्ता में उत्सव के अध्यक्ष डॉ० संजीव चोपड़ा ने कहा कि कोविड-19 के चलते यह उत्सव वर्चुअल किया जा रहा है लेकिन इस बार करीब एक लाख लोग इससे जुड़ेगे। उन्होंने बताया कि यह चैथा सीजन है लेकिन इस बार वर्चुअल उत्सव होने के कारण इसका लाभ अधिक लोग उठा सकेंगे। इसमें देश विदेश के एक लाख से अधिक लोग जुडेगे वहीं देश के विभिन्न क्षेत्रों के एक सौ से अधिक संस्थान व विश्वविद्यालय व स्कूल भी जुडेंगे। उन्होंने कहा कि पहले उत्सव में लेखक आते थे आपस में विभिन्न मुददों पर चर्चा करते थे, किताबे लाई जाती थी जिसे साहित्य प्रेमी देखते व पढ़ते थे लेकिन इस बार वर्चुअल होने के कारण यह सब नहीं हो पायेगा। उन्होंने कहा कि पहले प्रश्नोत्तरी में सभी प्रश्नों के उत्तर नहीं दिए जा सकते थे कुछ के ही दिए जाते थे लेकिन इस बार सभी प्रश्नों के उत्तर दिए जायेगे जिसमें कुछ समय को देखते हुए कार्यक्रम क े दौरान दिए जायेगे बाकी वेबसाइड के माध्यम से दिए जायेंगे। इस बार वर्चुअल उत्सव होने के कारण अगर किसी का कोई सत्र छूट जाता है तो वह बाद में भी देख सकता है क्योंकि सब रिकार्डेड होगा। उन्होंने बताया कि अभी तक करीब 20 से 30 हजार पंजीकरण हो चुके हैं और अभी और होने हैं। उन्होंने बताया कि उत्सव का उदघाटन धर्मगुरू दलाई लामा करेगे, अगर वह स्वयं अपना संदेश नहीं दे पाये तो तिब्बत के प्रधानमंत्री डात्र लोबसांग उनके संदेश को पढे़गे। अधिक तर करीब 95 प्रतिशत सत्र वर्चुअल होंगे व पांच प्रतिशत मसूरी में होंगे जिसमें मसूरी देहरादून व आस पास के साहित्यकार शामिल होंगे वहीं बताया कि फ्रांस के राजदूत एडवर्ट लिनेन मसूरी आयेंगे व भारत फ्रांस संबंधों पर चर्चा करेगे वहीं एक सत्र में फ्रांस के आधिपत्य में रहे चुके क्षेत्र जो आजादी के बाद भारत के आधिपत्य में आसानी से दिए गये उस पर भी चर्चा होगी वहीं पुर्तगाल के आधिपत्य वाले क्षेत्र जिसमें काफी जददोजहद हुई उस पर भी चर्चा होगी। वहीं भारत के राज्यों की सीमाओं व नाम के बदलने पर भी चर्चा की जायेगी। इस उत्सव में कविता पाठ, व पुस्तक पाठ भी होगा व कई बड़े लेखकों की पुस्तकों का विमोचन भी किया जायेगा। इस उत्सव में विदेश से भी करीब एक दर्जन साहित्यकार जुड रहे हैं। इस उत्सव की खास बात यह है कि इस बार कई सम सामयकि घटनाओं पर भी चर्चा की जायेगी।  भारत के पहले डीलिट डॉ० पीताबंर बर्त्वाल पर भी चर्चा होगी और जो इस साल करीब पांच सौ किताबे छपी है उन पर भी चर्चा की जायेगी। वहीं क्षेत्रीय भाषाओं की पुस्तकों जिनका अनुवाद अंग्रेजी या हिंदी में हुआ है वह भी सत्र में चर्चा में शामिल की जायेंगी। डिवेड भी होगी। इसलिए यह उत्सव विशेष होगा।