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किसान गोष्ठी पर आयोजित हुआ कार्यक्रम, मंत्री कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा कुछ ऐसा !

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देहरादून : कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल एवं सचिव, कृषि एवं कृषक कल्याण उत्तराखण्ड शासन द्वारा दीप प्रज्जवलित कर किसान गोष्ठी का शुभारम्भ करते हुए औद्यानिकी के क्षेत्र में उत्कृष्ठ कार्य कर रहे प्रगतिशील कृषकों कुन्दन सिंह पंवार, जयपाल सिंह चौहान, निर्मल तोमर, वेदपाल, सतेन्द्र सिंह, सत्यप्रकाश नौटियाल, देवेन्द्र सिंह चौहान , कु ० दिव्या, सुनील सिंह, पूनम सिंह, चतर दत्त जोशी, गणेश रावत इत्यादि को शॉल उढ़ाकर सम्मानित करते हुए पुरस्कृत किया गया।

इस अवसर पर उपस्थित प्रगतिशील कृषकों द्वारा अपने अनुभवों से विस्तृत रूप से अवगत कराते हुए औद्यानिकी के विकास में किये जा रहे कार्यों से भी अवगत कराया गया।

साथ ही सचिव , कृषि एवं कृषक कल्याण द्वारा औद्यानिकी पर प्रकाश डालते हुए कहा गया कि बागवानी आय का एक महत्वपूर्ण स्त्रोत है, जिसको दृष्टिगत रखते हुए राज्य में औद्यानिकी के विकास की सम्भावनाओं पर विस्तृत रूप से प्रकाश डाला गया।

वहीं कृषि एवं कृषक कल्याण मंत्री सुबोध उनियाल द्वारा सम्बोधित करते हुए अवगत कराया गया कि उत्तराखण्ड राज्य का उत्तर प्रदेश से पृथक होने का मुख्य उद्देश्य पर्वतीय क्षेत्रों से पलायन को रोकना था। राज्य की भौगोलिक परिस्थितियों एवं कृषि जलवायु को दृष्टिगत रखते हुए पर्वतीय क्षेत्रों से पलायन को रोकने में औद्यानिकी का विशेष योगदान है। कैबिनेट मंत्री ने कहा किसानों की आय दोगुनी करने हेतु उन्हें रेखीय गतिविधियों यथाः- मौनपालन, मशरूम, सगन्ध, औषधीय, पशुपालन, मत्स्य पालन, डेयरी इत्यादि से भी जोडने की आवश्यकता है।

मंत्री उनियाल द्वारा प्रसन्नता व्यक्त की गयी कि सेब उत्पादकों को उनके उत्पाद का अधिक मूल्य प्रदान कराने हेतु विभाग द्वारा उचित में सेब के कोरोगेटेड बॉक्सों का वितरण किया रहा है। उनके  द्वारा कृषि कानून पर प्रकाश डालते हुए अवगत गया कि कृषकों की आय दोगुनी करने के उद्देश्य से कृषि कानून में विभिन्न व्यवस्थायें यथाः- अपने राज्य से बाहर उत्पाद की बिक्री किये जाने की व्यवस्था, मण्डी शुल्क समाप्त किये जाने की व्यवस्था एवं निजी क्षेत्र में मण्डियों की स्थापना के साथ – साथ कृषकों को अनेक सुविधायें उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गयी है तथा कृषि कानून में कॉन्ट्रेक्ट फार्मिग किसानों हेतु स्वैच्छिक रखी गयी है अर्थात यदि किसान कॉन्ट्रेक्ट फार्मिग हेतु इच्छुक नहीं है तो वह पूर्ण रूप से स्वतन्त्र है।

मंत्री सुबोध उनियाल द्वारा अवगत कराया गया कि अरूणाचल प्रदेश में कीवी मिशन संचालन किया रहा है, जिसकी तर्ज उत्तराखण्ड में भी कीवी मिशन के क्रियान्वयन हेतु शीघ्र ही अरूणाचल प्रदेश के साथ समन्वय स्थापित कर कार्य योजना तैयार की जायेगी । राज्य में जैविक खेती को बढ़ावा देने हेतु जैविक एक्ट लागू करने वाला उत्तराखण्ड देश का प्रथम राज्य है। जैविक एक्ट के माध्यम से किसानों के उत्पादों को जैविक प्रमाण पत्र प्रदान कराते हुए उन्हें उनके उत्पाद का उचित मूल्य प्रदान कराया जा रहा है। साथ ही सरकार द्वारा कृषकों को उच्च गुणवत्तायुक्त पौध रोपण सामग्री की आपूर्ति सुनिश्चित करने हेतु ” उत्तराखण्ड फल पौधशाला अधिनियम ” में दण्ड का प्राविधान भी किया गया है।

कैबिनेट मंत्री सुबोध द्वारा कृषकों को उच्च गुणवत्तायुक्त अधिक उत्पादन वाली प्रजातियों के वितरण पर बल देते हुए किसानों की मांगानुसार प्रदेश के अन्तर्गत ही उच्च गुणवत्तायुक्त पौध रोपण सामग्री का उत्पादन किये जाने के निर्देश दिये गये। साथ ही अवगत कराया गया कि सरकार द्वारा विभाग के अधीन 94 राजकीय उद्यानों को श्रेणीकृत किया गया है, जिसमें से श्रेणी – ए के राजकीय उद्यानों में उच्च गुणवत्तायुक्त पौध रोपण सामग्री का उत्पादन किया जायेगा। इसके साथ ही श्रेणी – बी के राजकीय उद्यानों को लघुकालीन लीज व श्रेणी – सी के राजकीय उद्यानों को दीर्घकालीन लीज पर दिये जायेगा, जिसमें भी कम से कम 10 प्रतिशत क्षेत्र में उच्च गुणवत्तायुक्त पौध रोपण सामग्री का उत्पादन किया जायेगा ।

मंत्री उनियाल द्वारा प्रगतिशील कृषकों से यह भी अपेक्षा की गयी कि वह अपने अनुभवों से राज्य के कृषकों से भी समय – समय पर समन्वय स्थापित करें ताकि राज्य के कृषक उनके अनुभवों से लाभान्वित हो सकें ।

जिसके बाद हरमिन्दर सिंह बवेजा , निदेशक  उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण, उत्तराखण्ड कृषि एवं कृषक कल्याण मंत्री, हरबंस सिंह चुघ, सचिव, कृषि एवं कृषक कल्याण ज्ञापित करते हुए बताया कि में औद्यानिकी सम्भावनायें विद्यमान हैं , जिसको दृष्टिगत रखते हुए इस क्षेत्र में विकास किये जाने की आवश्यकता है।

डॉ. बवेजा द्वारा आस्वसत किया गया कि प्रदेश में औद्यानिकी के विकास हेतु राजकीय क्षेत्र के साथ – साथ व्यक्तिगत क्षेत्र में भी हर सम्भव प्रयास किये जायेगें तथा भविष्य में शीघ्र ही किसानों की मांगानुसार उच्च गुणवत्तायुक्त पौध रोपण सामग्री का उत्पादन राज्य के अन्तर्गत किया जायेगा। अन्त में डॉ. बवेजा द्वारा कैबिनेट मंत्री उनियाल द्वारा दिये गये निर्देशों एवं कृषकों के सुझावों के अनुसार समयबद्व कार्यवाही किये जाने का आश्वासन दिया गया ।

किसान गोष्ठी में डॉ. हरबंस सिंह चुघ , सचिव , कृषि एवं कृषक कल्याण , उत्तराखण्ड शासन , डॉ. हरमिन्दर सिंह बवेजा, निदेशक, उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण, संजय श्रीवास्तव, निदेशक , बागवानी मिशन , डा 0 रतन कुमार , संयुक्त निदेशक , अमर सिंह , उप निदेशक , डा 0 सुरेश राम , उप निदेशक , महेन्द्रपाल , उप निदेशक , अन्य अधिकारीगणों के साथ – साथ प्रगतिशील कृषक उपस्थित रहे।

इसके अतिरिक्त वीडियो कॉन्फ्रेन्स के माध्यम से समस्त मुख्य/जिला उद्यान अधिकारी व अन्य अधिकारीगण उपस्थित रहे ।