April 19, 2021
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सडक विहीन द्वींग-तपौण

सोनू उनियाल

जोशीमठ : आठ वर्षो के बाद भी अटल आदर्श ग्राम नही जुड सका सडक संपर्क मार्ग से। वर्ष 2009 मे तत्कालीन सीएम डा0 रमेश पोखरियाल निंशंक ने सडक का शिलान्यास किया था।

सीमांत प्रखांड जोशीमठ की द्वींग-तपौण ग्राम पंचायत को वर्ष 2009 मे अटल आदर्श ग्राम घोषित करते हुए यहाँ मूल भूत सुविधाओं से सुसज्जित करने का घोषणा की थी। और तब तत्कालीन सीएम डा0 रमेश पोखरियाल निंशंक ने जोशीमठ के गाँधी मैदान मे अन्य योजनाओ के साथ ही द्वींग-तपौण सडक-7किमी0 का शिलान्यास भी किया था। लेकिन अब आठ वर्ष हाने को है इस दिशा मे प्रारंभिक कार्यवाही तक नही हो सकी है।

घोषणा व शिलान्यास के बाद लोनिवि द्वारा सडक की सर्वे भी की गई लेकिन आठ वर्ष मे इस पर कोई कार्य तक शुरू नही हो सका। जिसके चलते द्वींग-तपौण के ग्रामीण पलायन को विवश हो रहे हैं।  सडक के लिए कई बार गुहार लगा चुके है। लेकिन अब ग्रामीणों का धैर्य जबाव दे रहा है। आठ वर्ष से सडक का इंतजार कर रहे ग्रामीणो के पास अब आंदोलन व आमरण अनशन ही विकल्प रह गया है। उनका कहना था कि यदि दो माह के भीतर सडक निर्माण की दिशा मे कार्यवाही नही हुई तो द्वींग-तपौण के ग्रामीण सडक के लिए सडको पर उतरेगे।

संपर्क करने पर लोनिवि के ईई डीएस रावत ने बताया कि लंगसी -द्वींग-तपेाण मोटर मार्ग के लिए सात मीटर चैडाई मे पेडो की गणना की जानी है। इसके लिए विभाग द्वारा दो वार वन विभाग को पत्र लिखा गया है। लेकिन वन विभाग ने वनो मे अग्नि लगने के कारण गणना के लिए समय नही दिया। शीध्र ही वन विभाग के साथ लोनिवि पेडो की गणना करेगा। इसी के बाद सडक निर्माण की आगे की कार्यवाही हो सकेगी।

वास्तव मे आजादी के सत्तर वर्ष बीतने के बाद जोशीमठ प्रंखड के कई गाँव आज भी सडक से अछूते है। जिनमे डुमक-कलगोठ, पल्ला-जखोला, पिलखी, भर्की , भेंटा, द्वींग-तपौण, किमाणा, लॉजी-पोखनी ,मल्ली टंगणी, व सुभाई आदि प्रमुख हैं। इन ग्रामीणों को आस थी कि छोटा राज्य बनने के बाद इनकी सुध ली जाऐगी। लेकिन राज्य बने 17वर्ष पूरे हो गए है। लेकिन इन क्षेत्रो के ग्रामीण आज मे 5 से 25किमी तक पैदल आवाजाही के लिए विवश है। बताते चले कि  द्वींग-तपौण को अटल आदर्श गा्रम घोषित कर यहाँ के लिए धनराशि सहित 7किमी सडक स्वीकृत हुई और वाकयदा मुख्य मंत्री द्वारा शिलान्यास भी कर दिया गया जब उस सडक के लिए आठ वर्ष बीतने के बाद पेडो की गणना तक नही हो सकी तो समझा जा सकता है कि सीमांत क्षेत्र के सडक विहीन गाँव को सडक से जुडने मे और कितने दशक लगगे !

 

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