April 14, 2021
Pradesh News24x7
  • Home
  • अभी-अभी
  • संस्कृत सप्ताह के तहत जागरूकता रैली निकाली।
अभी-अभी उत्तराखंड देहरादून सामान्य

संस्कृत सप्ताह के तहत जागरूकता रैली निकाली।

कपिल मलिक

मसूरी : संस्कृत सप्ताह के तहत श्री सनातन धर्म संस्कृत महाविद्यालय के छात्रों सहित आरएन भार्गव इंटर कालेज व सनातन धर्म गल्र्स इंटर कालेज के छात्र छात्राओं ने संस्कृत के प्रचार प्रसार के लिए जागरूकता रैली निकाली। जिसमें संस्कृत को बढ़ावा देने की मांग की गई।

लंढौर गुरूद्वारा चैक से संस्कृत सप्ताह के तहत जागरूकता रैली निकाली गई। रैली लंढौर बाजार, घंटाघर, कुलड़ी मालरोड, शहीद स्थल होते हुए गांधी चैक तक गई। रास्ते भर संस्कृत महाविद्यालय के छात्र वैदिक मंत्र पढ़ने के साथ संस्कृत के प्रति जागरूकता से संबंधित नारे लगा रहे थे। संस्कृत महाविद्यालय के प्राचार्य बृजेश सयाना ने बताया कि संस्कृत सप्ताह भारत सरकार के निर्देश पर मनाया जा रहा है जिसके तहत जागरूकता रैली से इसका शुभारंभ किया गया है। इसके बाद सप्ताह भर महाविद्यालय में सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ ही योग व अन्य कार्यक्रम किए जायेगें। उन्होंने कहा कि संस्कृत राजय की दूसरी भाषा है। इस मौके पर संस्कृत महाविद्यालय के प्रबंधक वैभव तायल ने बताया कि संस्कृत हमारी मातृ भाषा है जिसके प्रचार प्रसार व लोगों को इस भाषा के प्रति आकर्षित करने के लिए यह रैली निकाली जा रही है। रैली में शामिल संस्कृत महाविद्यालय के छात्र आशीष थपलियाल ने कहा कि एक ओर सरकार ने संस्कृत को दूसरी राजभाषा का दर्जा दे रखा है लेकिन वहीं संस्कृत विद्यालयों की हालत दयनीय है यहाँ तक कि शिक्षक भी नहीं हैं ऐसे में छात्रों की पढाई प्रभावित हो रही है। उन्होंने सरकार से मांग की कि संस्कृत विद्यालयों में शिक्षकों की नियुक्ति करने के साथ ही विकास के लिए संसाधन उपलब्ध करायें। इस मौके पर अमित गर्ग, आचार्य संजीत लेखवार, शेखर सेमवाल, प्रवीण बंधानी, मीनाक्षी चैहान, गीता रावत, शैलेंद्र बिष्ट, अर्चना रानी सहित विभिन्न विद्यालयों के छात्र छात्राएं मौजूद रही।

एक ओर प्रदेश सरकार संस्कृत को बढ़ाने की बात कर रही है तथा प्रदेश की दूसरी राजभाषा का दर्जा दे रखा है वहीं पूरे प्रदेश में संस्कृत विद्यालयों की हालत दयनीय बनी हुई है। अगर मसूरी की बात करें तो यहां पर संस्कृत महाविद्यालय में कक्षा प्रथमा से लेकर शास्त्री तक मात्र एक शिक्षक पूर्ण कालिक है। जबकि आठ शिक्षक प्रबंध तंत्र की ओर से रखे गये हैं। वहीं विद्यालय में एक भी चतुर्थश्रेणी कर्मचारी भी नहीं हैं ऐसे में कैसे संस्कृत का विकास हो सकता है। वहीं सरकार की ओर से संस्कृत विद्यालयों के विकास के लिए कोई मदद भी नहीं की जाती। जो भी मदद होती है वह सनातन धर्म सभा करती है।

Related posts

सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की धज्जियां उड़ा रहे हैं कांग्रेस नेता

Pradesh News24x7

शांति मनुष्य से दूर नहीं है , और मनुष्य शांति से दूर नहीं है ।। जिस चीज की मनुष्य को तलाश है वह उसके अंदर है – प्रेम रावत

Pradesh News24x7

अग्नि शमन सेवा विभाग ने अग्नि सुरक्षा सप्ताह मनाया।

pradeshnews24x7

Leave a Comment