April 18, 2021
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राफेल डील मोदी सरकार का सबसे बड़ा महाघोटाला-नव प्रभात।

बिजेंद्र पुंडीर

मसूरी : प्रदेश के पूर्व मंत्री नव प्रभात ने मोदी सरकार पर रॉफेल सौदे में  बड़े घोटाले का आरोप लगाते हुए कहा कि यह भाजपा सरकार का महाघोटाला है। 36 राफेल लड़ाकू जहाजों की एक तरफा खरीद इस खरीद में सरकारी कंपनी हिंदुस्तान एरोनाटिकल्स लिमिटेड को दर किनार कर रिलायंस की कंपनी रिलायंस डिंफेंस लिमिटेड को कांटेªक्ट देना तथा जहाज की कीमतों में तीन गुना वृद्धि से यह साबित हो गया है कि यह महाघोटाला है तथा मोदी सरकार इस गंभीर सवाल पर उत्तर देने के बजाय कुतर्क प्रस्तुत कर देश को गुमराह कर रही है।

मसूरी के कुलड़ी स्थित एक रेस्टोरेंट के सभागार में आयोजित पत्रकार वार्ता में पूर्वमंत्री नव प्रभात ने कहा कि राफेल जहाज बनाने वाली कंपनी डसॉल्ट एविएशन ने 13 मार्च 2014 को एक वर्क शेयर समझौते के रूप में सरकारी कंपनी हिंदुस्तान एयरोनाटिक्स लिमिटेड से 36 हजार करोड़ के ऑफसेट कांट्रेक्ट पर हस्ताक्षर किए। परंतु प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का क्रोनी कैपिटिलिज्म प्रेम तब जगजाहिर हो गया जब 10 अप्रैल 2015 को 36 रॉफेल जहाजों के खरीद की मोदी ने एकतरफा घोषणा कर सरकारी कंपनी एचएएल को इस सबसे बड़े डिफेंस ऑफसेट कांट्रेक्ट से दरकिनार कर दिया व इसे निजी कंपनी को दे दिया गया जिसे इस क्षेत्र का शून्य भी ज्ञान नहीं था और न ही इस कंपनी के पास लड़ाकू जहाज बनाने का लाइसेंस था। इसमें न पार्टी न रक्षा मंत्री न कैबिनेट न किसी अन्य की भी सहमती नहीं ली गई जो कि तानाशाही प्रवृति का द्योतक है। उन्होंने कहा कि आश्चर्य वाली बात ये है कि रिलायंस एयरोस्ट्रक्चर लिमिटेड को रक्षा मंत्रालय द्वारा लड़ाकू जहाजों के निर्माण का लाइसेंस तो दिया गया लेकिन 2015 में लाइसेंस का आवेदन देने व उसके बाद लाइसेंस दिए जाने की तिथि 22 फरवरी 2016 को इस कंपनी के पास लड़ाकू जहाज बनाने की फैक्ट्री लगाने के लिए न तो कोई जमीन थी और न ही उस पर कोई भवन था। इस कंपनी का गठन 24 अप्रैल 2015 को किया गया जबकि प्रधानमंत्री ने 10 अपै्रल 2015 को फ्रांस में राफेल जहाज खरीद की घोषणा 14 दिन पूर्व ही की। वहीं कहा कि 30 हजार करोड़ के डिफेंस आफसेट कांट्रेक्ट रिलायंस समूह को दिए जाने के बारे में रक्षामंत्री निर्मला सीतारमण की झूठ जगजाहिर हो जाती है। जो कि डिफेंस आफसेट कांट्रेक्ट के दिशा निर्देशों का घोर उलंघन है। उन्होंने कहा कि कुछ ऐसे सवाल हैं जिनका उत्तर आज तक नहीं मिला जिसमें क्या रिलायंस एवं डसॉल्ट एविएशन 30 हजार करोड़ के आफसेट कांट्रेक्ट पर रक्षा मंत्री की अनुमति के बिना हस्ताक्षर कर सकते हैं। क्या इस आफसेट पर रक्षा मंत्रालय के एक्विजेशन क्यों नहीं किया गया, डीओएमडब्लू द्वारा छह महीने में किया जाने वाला आडिट क्यों नहीं किया गया, एक्विजेशन विंग ने डिफेस एक्जिवेशन कांउंसिल को अपनी वार्षिक रिपोर्ट जमा कराई, यदि नही तो इसका नियमों निर्देशों को ताक पर रखने की अनुमति है। पूर्व मंत्री नव प्रभात ने बताया कि यूपीए सरकार के दौरान राफेल लडाकू जहाज की कीमत 526.10 करोड़ अर्थात 36 विमानों की कुल कीमत 18940 करोड़ थी जिसको मोदी सरकार ने 1670.70 करोड़ प्रति जहाज अर्थात तीन गुना अधिक पर 60145 करोड़ में खरीदे। इस बात का उत्तर भाजपा के पास है कि आखिर किसको लाभ पहुंचाने के लिए 41205 करोड़ रूप्यें अधिक दिये गये। पत्रकार वार्ता में पूर्व विधायक जोत सिंह गुनसोला, पूर्व पालिकाध्यक्ष मनमोहन सिंह मल्ल, शहर कांग्रेस अध्यक्ष सतीश ढौडियाल, महामंत्री जावेद खान, मसूरी विधानसभा युवा कांगे्रेस अध्यक्ष वसीम खान, भगवती कुकरेती, रामप्रसाद कवि, राजीव अग्रवाल, महिमानंद आदि मौजूद रहे।

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