April 14, 2021
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पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वतीजी हुये लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड से सम्मानित

संवाद सूत्र ऋषिकेश

ऋषिकेश : भारत सरकार के विदेश मंत्रालय एंव निशा फाउण्डेशन के संयुक्त तत्वाधान में संसद भवन एनेक्स नई दिल्ली में आयोजित समारोह में गंगा संरक्षण एवं पुनर्जीवन के लिये परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष एवं गंगा एक्शन परिवार के प्रणेता स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज को ’लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड’ पुरस्कृत किया गया।

स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने गंगा एवं उसकी सहायक नदियों के पुनरूद्धार के लिये अनेक देशी-विदेशी वैज्ञानिकों, पूज्य संतों, विभिन्न धर्मो के धर्मगुरूओं, प्रतिष्ठत संस्थाओं, नागरिक समुदाय, स्कूल-कालेज के छात्र-छात्राओं के प्रेरित किया तथा पूरे संसार में इस हेतु अलख जगाया है इस हेतु उन्होने अनेक जन जागरण अभियान चलाया है जिसके अद्भुत परिणाम भी प्राप्त हो रहे है।

संसद भवन नई दिल्ली में आयोजित समारोह के प्रमुख अतिथि हरियाणा के राज्यपाल प्रोफेसर कप्तान सिंह सोलंकी,  मानव संसाधन विकास, गंगा पुनरूद्धार एवं जल संसाधन राज्य मंत्री सत्यपाल सिंह जी, निशा फाउण्डेशन की चेयरमैन डॉ. प्रियंका प्रकाश, सचिव सी.पी.वी.ओ.आई.ए, विदेश मंत्रालय भारत सरकार ज्ञानेश्वर मुले एवं जीवा की अन्तर्राष्ट्रीय महासचिव साध्वी भगवती सरस्वती जी एवं अन्य अतिथियों की उपस्थिति में स्वामी जी महाराज को लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड से सम्मानित किया गया। इस कार्यक्रम की मेजबानी संसद सदस्य लोकसभा बीरेन्द्र कुमार चैधरी जी ने किया।

स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने कहा कि हमारा सौभाग्य है कि देश के पास श्रेष्ठ विचारों और श्रेष्ठ संस्कारों को आगे बढ़ाने वाली सरकार है जिसका नेतृत्व यशस्वी, तपस्वी कर्मयोगी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी कर रहे है। हमारी इस दिव्य संस्कृति के यह नारा ’सबका साथ-सबका विकास’ जो वर्तमान सरकार ने दिये यही तो हमारी संस्कृति है। उन्होने कहा कि जिस संसद में हम बैठे है वह संसद जहां ऋषियों ने समता, समरसता और सद्भाव का संदेश दिया वहीं इस संसद का भी उद्देश्य है। इस देश की संसद ने जो संविधान दिया है वह संविधान ही इस देश का समाधान है; वह संविधान ही इस देश की आत्मा है इसलिये संसद में बैठकर इस देश की गौरवमयी परम्परा को आगे बढ़ाये तथा इस गौरवमयी परम्परा के अनुरूप जीवन जिये। साथ ही उन्होने कहा कि आज का यह संदेश की कोई भी एक-दूसरे को भेदभाव-ऊँचनीच व छोटे-बड़े की दृष्टि से न देखे।

इसलिये भेदभाव, ऊँचनीच व छोटे-बडे की दीवारों को तोड़ते हुये एक-दूसरे का सम्मान करना सीखे; एक दूसरे के विचारों का सम्मान करना सीखे। हमारे बीच मतभेद हो सकते है लेकिन मनभेद कभी न हो।

संसद भवन में आयोजित कार्यक्रम में जीवा की अन्तर्राष्ट्रीय महासचिव साध्वी भगवती सरस्वती जी ने कहा कि मुझे विश्व के अनेक देशों में जाने का अवसर प्राप्त हुआ परन्तु जब मैं भारत आयी तब भारत को देखते ही मुझे लगा की भारत ही मेरी कर्मभूमि है और भारत ही मेरी धर्मभूमि है। उन्होने कहा कि भारतीय संसद से मेरी प्रार्थना है कि अपने जो भारतीय मूल्य है, भारत की संस्कृति है वह के केवल भारत के लिये ही नहीं बल्कि पूरे संसार के लिये है इसलिये आईये संसद से संसार के लिये सोचे।

प्रोफेसर कप्तान सिंह सोलंकी जी, ने कहा कि भारतीय संस्कृति समता की संस्कृति है। यह पूरे समाज के लिये सोचने वाली संस्कृति है; भारतीय संस्कृति दिव्य संस्कृति है।

मानव संसाधन विकास, गंगा पुनरूद्धार एवं जल संसाधन राज्य मंत्री श्री सत्यपाल सिंह जी ने कहा कि गर्व करो हम भारतीय है । हमें भारतीय विचार पद्धति के माध्यम से सदियों पहले हमें जो हमारे ऋषिमुनियों ने दिया है उससे हम गौरवान्वित हो। उन्होने कहा कि आज की हमारी शिक्षा पद्धति को प्रयोग हम केवल नौकरी के लिये ही नहीं करे बल्कि उसे अपने जीवन का अंग भी बनाये।

अभिनेत्री प्रियंका प्रकाश ने कहा कि मैने फिल्म जगत में अनेक वर्षो तक काम किया है लेकिन मुझे वहां जो संतोष प्राप्त होना चाहिये था वह नहीं हुआ। मॉडलिग और कई फिल्मों में काम करने के बाद मुझे लगा कि मुझे ऐसे कामों से जुड़ना चाहिये जिससे मुझे आत्म संतोष मिले, तो मैं सेवा के कामों में जुट गयी। साथ ही मैने फुटबाल की टीम के लिये, माननीय सांसदों और अभिनेता-अभिनेत्रियों के बीच काम करना शुरू किया इससे मुझे संतोष और सफलता प्राप्त हुयी। मैं, आज के इस कार्यक्रम में आकर अपने को गोरवान्वित महसूस कर रही हूँ। मैं इसी तरह सेवा के भाव को आगे बढ़ाये रखुंगी और सेवा करती रहुंगी।

सचिव सी पी वी ओ आई ए, विदेश मंत्रालय भारत सरकार ज्ञानेश्वर मुले ने कहा कि हमारे देश की परम्परा अद्भुत है; महान है आईये हम उस परम्परा के अनुसार आगे बढ़े और आगे बढ़ाये।

इस ऐतिहासिक कार्यक्रम में सांसद दलजीत सिंह मल्ला जी द्वारा संसद के लम्बे समय के अनुभव पर आधारित पुस्तक के लिये सभी ने उनको साधुवाद दिया जो प्रकाशित होने वाली है। इस आयोजन को आयोजित करने हेतु प्रकाश को सभी ने धन्यवाद दिया। इस अवसर पर अनेक गणमान्य विभूतियां उपस्थित थी।

 

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