April 19, 2021
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अभी-अभी उत्तरकाशी उत्तराखंड

इतिहास बन गया इन गांवों की बसायत, अब पड़े वीरान

जय प्रकाश बहुगुणा

बड़कोट : ये विरान छाया चित्र है उन गांवो का जहां कभी पूरे गांव खुब भरे रहते थे । बच्चो की किलकारियां महिलाओ
की पनघट की तरफ बर्तनो की मधुर आवाजे और पुरूषो की किसी बरामदे में बैठे हुक्का गुड़गुड़ाने की और तेज ठहाके खुब सुनने को मिलते थे लेकिन आज ये गांव विरान पडे है| यहां के निवासी हैरान थे सरकार की नीतियो से और परेशान थे आने वाले भविष्य के प्रति और अन्तत ईक्कीसवी सदी के प्रारम्भ मे पलायन कर गये| ये गांव है जिला उत्तरकाशी के अधिन नौगाव विकासखंड के अन्तर्गत आने वाली कोटला ग्रामसभा की जहां 4 गावों को मिलाकर ग्रामसभा बनी । ये गांव है जखाली,धौसाली, घुंड और कोटला सभी गावों मे लगभग 210 परिवार रहते थे । लेकिन सरकार की नीतियो के कारण लोग इस खुबसुरत जगह को छोडने को मजबुर हो गये । जहां कोटला में लगभग 78प्रतिशत लोगों ने पलायन किया वही बाकी 3 गावों में 98 प्रतिशत लोगों ने पलायन कर लिया । रहते भी तो कैसे ना शिक्षा ना चिकित्सा नाही आवागमन के लिये रोड रास्ते भी हर साल बरसात मे टुट जाते थे और उन्हे बनने में फिर एक दो साल लग जाते थे और क्षेत्र के प्रतिनीधि भी आज तक एेसे तीसमारखां बने जिन्होने कभी इन चीजो पर ध्यान ही नही दिया बल्कि प्रतिनीधि बनने पर सबसे पहले सुबिधाजनक स्थान पर पलायन कर गये और गांव के सीधे सादे लोग समझ रहे भे कि बिकास हो रहा है परन्तु यह विकास ना होकर विनाश और खंडरता की नींव पड़ रही थी।
ईक्कीसवी सदी के प्रारम्भ तक अगर किसी ने पलायन रोका तो वह था यहां का नकदी फसलो का ब्यवसाय यहां की ऊपजाव जमीन मे हर परिवार कई कुन्टल चौलाई ,मड़वा,राजमा आदि उगाया करते थे। और यहां के आलू की मंडी मे भी विशेष मांग होती थी हर परिवार आलू के सिजन मे 30 से 80 कुन्टल आलू बैचा करते थे जिस कारण कई सालो तक यह रोजगार पलायन पर भारी पडा़ । फिर कुछ सरकार की अपेक्षा से नाखुश और कुछ जगली जानवरों के आतंक से लोग धीरे धीरे परेशान हो गये । ये सब परेसानियां और आने वाली पीढी का भविष्य ध्यान में रखते हुये अधिकतर परिवार पलायन कर गये 1998 के आसपास उस समय के ग्राम प्रधान सोवेन्द्र सिह राणा जी के विशेष निवेदन पर उत्तरकाशी विधायक जी ग्राम जखाली में मन्दिर सोन्दर्यकरण और खेल मैदान का उदगाटन करने आये खुब भाषण बाजी हुयी 2 साल के भीतर रोड आने का भरोषा दिया गया लेकिन दुर्भाग्य की बात है 2 साल की जगह आज 21 साल हो गये लेकिन रोड़ अभी भी मुंगेरीलाल के सपने के समान है ।गावों के उपरी क्षेत्र मे सभी परिवारो के बगीचे है एक समय था जब यहां खुब सेब हुआ करता था लेकिन अब सारे बगीचे बंजर है कारण यह रहा की यहा के लोगो को सेब उत्पादन की जानकारी का ना होना और पानी के प्राकृतिक जलाशयो का विलुप्त होना
अगर कोई दोषी है तो वो है ईस क्षेत्र के प्रतिनीधि जिन्होने सबसे पहले पलायन किया अगर वे लोग पलायन ना करते तो शायद यह क्षेत्र आज आवाद होता आजतक न जाने कितने प्रतिनीधि आये और चले गये विधायक , सांसद आये और घोषणा करके चले गये पर ये क्षेत्र आज भी विरान है ।
क्षेत्रिय नेताओ प्रधान , क्षेत्रपंचायत ,जिला पंचायत और माननीय विधायक और सांसद महोदय ध्यान दे इस क्षेत्र को आवाद करने के सम्बन्ध में आप आये इस क्षेत्र में और मुआयना करें आपको प्रदेश स्तर पर टीआरपी और क्षेत्रिय लोगो को फिर से इन चार मंजिला भवनो को आवाद करने का मौका मिलेगा और यहां के निवासी फिर से एक वार अपने खेतों मे खुब मेहनत करते दिखेंगे।

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