April 18, 2021
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अटल बिहारी के निधन से मसूरी में शोक की लहर, मसूरी उनका प्रिय शहर था।

बिजेंद्र पुंडीर

मसूरी : पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेई के निधन से पूरी मसूरी में शोक की लहर छा गई। वहीं जिनसे उनके निजी संबंध रहे उन्हांेने कहा कि देश ने एक महान देशभक्त, लेखक पत्रकार कवि व सर्वमान्य नेता खो दिया जिसकी भरपाई होना संभव नहीं है। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेई का मसूरी से गहरा नाता रहा है। वह मसूरी कई बार आये व उन्हें यहां घर जैसा माहौल मिलता था। पहाड़ों की रानी मसूरी को ऐसे महान नेता पर गर्व है। वे यहां आकर एकांत भवन में रूकते थे जो हरियाणा सरकार का गेस्ट हाउस है।

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेई का मसूरी से गहरा नाता रहा है। वे यहां कई बार आये व यहां पर स्थानीय कार्यकर्ताओं के साथ कई बैठकें भी की। इस संबंध में भाजपा के वरिष्ठ नेता मदनमोहन शर्मा बताते हैं कि बाजपेई यहां कई बार आये व यहां के छोटे बड़े कार्यक्रमों में भी हिस्सा लिया जो उनकी महानता थी। उन्होंने बताया कि वह हरियाणा गेस्ट हाउस एकांत में रूकते थे व वहां से अपने पीए शिव प्रकाश के साथ पैदल लाइब्रेरी मेरी दुकान पर आते थे यहीं पर बैठ कर चाय आदि पीते व घंटो वार्ता करते जिसमें राजनीति से लेकर साहित्य व कविताओं पर भी बात करते। वहीं यहां पर कई बार पार्टी की बैठकों में भी शरीक हुए। जिसमें गढ़वाल टैरेस, शिशु मंदिर व आरके पुरी के यहाँ बैठक की। बाजपेई जी जब उनके पास बैठते थे तो कार्यकर्ताओं को हतोत्साहित नहीं होने देते जब देश में भाजपा की दो सीटें रह गई तो उन्होंने कार्यकर्ताओं का आहवान किया था कि वे निराश न हों पार्टी के लिए कार्य करें व विचारधारा को आगे बढ़ायें जिसके परिणाम स्वरूप बाजपेई प्रधानमंत्री बने व आज देश में भाजपा का परचम है। अटल बिहारी बाजपेई के साथ बिताये पल सुनाते हुए आरएन माथुर ने कहा कि वह मसूरी कई बार आये व एक बार जब मसूरी आये तो उन्होंने गांधी चैक पर आम सभा की व उसके बाद मेरे निवास पर आये व यहीं पर दिन का भोजन किया। इस संबंध में हरियाणा के एकांत भवन के कर्मचारियों ने बताया कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहार बाजपेई आते थे व यहीं पर शूट नंबर एक जिसे सीएम सूट कहा जाता है उसमें रूकते थे। हमें गर्व है कि बाजपेई इस भवन में रूकते थे लेकिन आज सुन कर बहुत निराशा हो रही है। वरिष्ठ पत्रकार बिजेंद्र पुंडीर ने बताया कि अटल बिहारी बाजपेई से उनकी तीन बार मुलाकात हुई। गढवाल टैरेस की बैठक में भी वह मौजूद रहे व लाइब्रेरी में जब आम सभा की व उसके बाद प्रिंस होटल गये व वहां पर श्रमिक हड़ताल पर थे तो उन्होंने उनसे बात की व आंदोलन समाप्त करवाया। वहीं एक बार बाजपेई अचानक बिना बताये मसूरी आये व वे शूट में  थे व लंढौर चैक पर एक पान की दुकान से पान लिया जब मैने देखा कि यह तो बाजपेई है तो तत्काल भाजपा के तत्कालीन नेता राधे श्याम तायल व राकेश अग्रवाल को बताया तो उन्होंने तुरंत उनका पीछा किया व उसके बाद गांधी निवास सोसायटी में उन्होंने कार्यकर्ताओं के साथ बैठक की। उन्होंने बताया कि जब बाजपेई मसूरी आये थे तब एक चैकीदार मेरे पास आया व कहा कि उन्हें बाजपेई जी से मिलना है मैने उनके सुरक्षा कर्मियों से कहा जिस पर उन्होंने मना किया तब मैने उनका नाम लिखकर दिया व सुरक्षा कर्मियों को उनके पास पहुंचाने को कहा उन्होंने वह पर्ची बाजपेई जी को दी तो वे तुरंत बाहर आ गये व उन्हें गले से लगाया व पूरे परिवार के हाल चाल पूछे तो यह दृश्य देख मै खुद हैरान हो गया। जब मैने उस चैकीदार से पूछा तो उन्होंने कहा कि जब दिल्ली में बाजपेई जी साधारण आरएसएस के कार्यकर्ता थे तब वे वहीं कार्यालय में रहते थे तो बाजपेई उसी कमरे में मेरे साथ रहते थे। यह उनकी महानता है कि उन्होंने उन्हें याद रखा यहीं उनकी खासियत थी।

अटल बिहारी बाजपेई जब जुलाई 1994 में मसूरी आये थे तब गढ़वाल टैरेस में भाजपा कार्यकर्ताओं की बैठक ली। इस मौके पर उन्होंने कहा कि होटल बहुत सुंदर बनाया। उन्होंने जीएमवीएन के होटल गढ़वाल टैरेस होटल के पैड पर लिखा कि पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए ऐसे साफ सुथरे होटलों की आवश्यकता है। अगर अवसर लगा तो यहां एक दिन रूक कर जरूर आनंद उठाउंगा। वे यहां हरियाणा सरकार के गेस्ट हाउस एकांत में रूकते थे वहीं एक बार लाइब्रेरी स्थित मोदी भवन में भी रूके थे।

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