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Mussoorie : दुर्घटनाओं में अपना जीवन दांव पर लगा दूसरों को बचाने चले आते हैं देवदूत दिगंबर उर्फ टीटू।

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बिजेंद्र पुंडीर

मसूरी : पहाड़ों में आये दिन दुर्घटनाएं होती रहती है। इसी कड़ी में मसूरी भी है यहां प्रतिवर्ष बड़ी संख्या में सड़क दुर्घटनाएं होती हैं। जिसमें बड़ी संख्या में लोगों की मौत हो जाती है। लेकिन एक युवक ऐसा है जो किसी भी दुर्घटना में देवदूत बनकर सामने आता है और बिना किसी के कहने पर अपनी टीम के उपकरण लेकर आता है और गहरी खाई में उतर कर लोगों की जान बचाने व मृतकों को लाने में निस्वार्थ सेवा करता है। इस देवदूत का नाम दिगंबर उर्फ टीटू है। जिसने आज तक मसूरी व आसपास के क्षेत्र में सड़क दुर्घटना में घायल सैकड़ो लोगों की जान बचा चुका है व सैकड़ों मृत व्यक्तियों को अपने कंधों पर लाद कर खडड से निकाल चुका है। ऐसे निस्वार्थ व सेवाभाव से परिपूर्ण युवक को आज तक राज्य सरकार से कोई सम्मान नहीं मिल पाया। लेकिन वह सम्मान के लिए नहीं बल्कि अपने परिवार से मिले संस्कारों से आत्मिक संतोष के लिए यह कार्य करता है और लगातार कर रहा है।

दिगंबर उर्फ टीटू पुत्र स्व मदन लाल निवासी जबर खेल लंढौर की उम्र अभी मात्र 31 वर्ष है और उसने इस उम्र में न जाने कितने जाने अनजाने लोगों की जानें बचाई जिन्हें वह जानता तक नहीं। आज भले ही वे लोग देश या विदेश में जहां रहते होंगे दुआ देते होंगे और यही संबंल उन्हें खोज एंव बचाव के लिए प्रेरित करता है। मसूरी व आस पास के क्षेत्र में जहां कहीं सड़क दुर्घटना होती है वह देवदूत बनकर पहुंच जाता है। मसूरी पुलिस,एडीआरएफ, आईटीबीपी, फायर सर्विस व 108 के बीच उनकी अलग पहचान है अगर कहीं दुर्घटना होती है तो ये विभाग भी टीटू को फोन कर देतें है और तब चाहे दिन हो या रात वह निस्वार्थ सेवा में लग जाता है। हालांकि उनका पेशा पर्वतारोहण, ट्रेकिंग है जिसमें उसे पारंगत हासिल है और उन्होंने इस क्षेत्र के सभी कोर्स, एडवांस कोर्स कर रखे हैं जिससे उसकी रोजी रोटी चलती है। जब वह ट्रेकिंग व पर्वतारोहण पर जाया होता है अगर वहां या रास्ते में भी कोई दुर्घटना होती है तो वहां भी वह इसी शिददत से अपना कार्य छोड़ घायलों की जान बचाने खडडों में कूद जाता है। घायलों की सेवा उनकी रग रग में है। दिगंबर उर्फ टीटू ने अनेक क्षेत्रों में कोर्स कर पारंगत हासिल किया है। एक्सपीडीशनल माउंटेनियरिंग एंण्ड आउट डोर लीडर दिगंबर टीटू ने नेहरू पर्वतारोहण संस्थान निम उत्तरकाशी से बेसिक माउंटेनियरिंग का कोर्स किया, उसके बाद एडवांस माउंटेनियरिंग कोर्स एण्ड स्पेशल हाई अल्टीट्यूट ट्रेकिंग कोर्स भी किया। वहीं उन्होंने अमेरिका के एजुकेशन फ्रॉम नेशनल आउटडोर लीडरशिप स्कूल पैसेफिक नार्थवेस्ट से डिप्लोमा इन आउटडोर का कोर्स किया। वुडस्टाक स्कूल के हनीफल सेंटर से ट्रेक लीडर का कोर्स किया। अमेरिका के नेशनल आउटडोर लीडरशिप स्कूल विल्डरनेस मेडिशियन इंस्टीट्यूट से विल्डरनेस फस्टएड का कोर्स किया। इसके अलावा अमेरिका के एरी बैक कंट्री मेडिशन मिजोला मोन्टान से  विल्डरनेस फस्ट रिस्पोंडर का कोर्स किया तथा दिल्ली के इंडियन माउंटेनियरिंग फाउंन्डेशन से हाई अल्टीट्यूट माउंटेनियरिंग अल्पाइन कोर्स किया। दिगंबर उर्फ टीटू ने वर्ष 2011 में 21 हजार फीट उंची बंदरपूछ चोटी को फतह किया, उसके अलावा पीर पंजाल क्षेत्र कश्मीर के बड़ा शीगरी ग्लेशियर हालौल स्पीति की कुल्लू पमोरी 21 हजार 500 फीट पर फतह की। इसके अलावा अमेरिका में भी कई चोटियां फतह की। वहीं उनका मुख्य कार्य टैंकिंग का है जिसके तहत उन्होंने अपनी कंपनी बनाई है। जिसका नाम स्क्रेबलिंग एडवेंचर्स एंण्ड आउटडोर है वह इंडियन माउंटेनियरिंग फाउंडेशन दिल्ली के रिस्क एसीसमेंट कमेटी के सदस्य भी हैं। अब उन्होंने अपी वेबसाईड भी बना ली है। उन्होंने देश विदेश से हिमालयी क्षेत्र में ट्रेकिंग करने आने वालों को पूरे उत्तराखंड के गढवाल व कुमाउं के रूपकुंड, हरकी दून, वैली ऑफ फलावर, गोमुख, तपोवन, ड्योडीताल, मयाली कांठा, केदारनाथ, केदार कांठा, हस्ता पास, रूपिन पास, बडासू पास, दुग्धार पास, कांडी पास, काणासर पास, केदार ताल, क्वारी पास, बराडसर पास आदि के साथ ही हिमाचल प्रदेश, व कश्मीर में भी ट्रेकिंग करवाई है। ये सभी टेकिंग स्थल 15 हजार फीट के आसपास हैं। जिसमें भारतीयों के साथ ही अमेरिकन, जर्मन, इजराइल, बाग्लादेश, आस्ट्रेलिया, फ्रांस, इंग्लैड, कनाडा, आयरलैंड, इटली, कंबोडिया, स्पेन सहित अन्य देशों के ट्रेकर शामिल हैं। उन्होंने बताया कि सबसे अच्छे लोग कनाडा व भारत में मुबंई के मराठी होते हैं जो पूरा सहयोग करते हैं। उन्होंने बताया कि टैंकिंग के दौरान सबसे अधिक परेशानी रिस्क मैनेजमेंट की होती है क्यों कि अगर कोई पहाड़ी से गिर गया तो उसे सही स्थान पर पहुंचाने में भारी परेशानी होती है। वहीं ग्रुप मैनेजमेंट में भी परेशानी होती है। क्यों कि उसमें विभिन्न देशों के ट्रेकर होते है उनकी भाषा, खानपान अलग होता है जिस कारण खासी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। उनको एक साथ रखना काफी कठिन होता है। उन्होंने बताया कि एक बार ट्रेकिंग के दौरान हिमाचल के धर्मशाला क्षेत्र के इंदिरा हार पास में वुड स्टाक स्कूल का एक शिक्षक गिर गया उन दिनों वह मसूरी में थे जैसे ही पता चला और वह उसे निकालने के लिए चल पडे़ व उन्हें वहां के स्थानीय लोगों की मदद से निकाला और सुरक्षित पहुंचाया।

खोज एवं बचाव में दिगंबर उर्फ टीटू की रूचि होने पर उन्होंने बताया कि यह प्रेरणा उनको अपने पिता की मृत्यु से मिली। वह घर जाते समय पहाड़ी से गिर गये व मर गये तब सोचा कि अगर कोई इन्हें खडड में जाकर बचा लेता तो आज मेरे पिता जिंदा होते। उन्होंने पिता की मृत्यु से सीख व प्रेरणा लेते हुए तय किया कि वह अब सड़क या अन्य दुर्घटना में घायलों को बचाने का कार्य करेंगे और तब से लगातार इस कार्य को वह अपनी रोजी रोटी से अधिक प्राथमिकता देते हैं। पुलिस सहित अन्य विभागों में उनका नाम व मोबाइल नंबर दर्ज है जब भी कोई सूचना मिलती है वह अपनी टीम व खोज एवं बचाव के उपकरण लेकर चल देते हैं। यहीं कारण है कि आज तक उन्होंने सैकड़ों स्थानीय लोगों के साथ ही पर्यटकों को बचा कर उनको नया जीवन दिया व कई लोगों की लाशें खडडों से निकाल कर सड़क तक पहुचाई। उन्होंने कहा कि इस कार्य से उन्हें जितना आत्मिक संतोष मिलता है वह अन्य किसी कार्य से नहीं मिलता। उनके इस निस्वार्थ सेवा कार्य के लिए वुडस्टाक स्कूल, स्वाधीनता दिवस पर नगर पालिका व नगर प्रशासन, एवं स्टेट यूनियन ऑफ वर्किंग जर्नलिस्ट मसूरी शाखा सम्मानित कर चुकी है मसूरी पुलिस भी उन्हें सम्मानित करने का प्रयास कर रही है लेकिन ऐसे देवदूत हो प्रदेश स्तरीय राज्यपाल का अवार्ड मिलना चाहिए, उन्हें ऐसे साहसिक कार्य के लिए बे्रवरी अवार्ड मिलना चाहिए। लेकिन उनकी पहुंच न होने के कारण अभी तक किसी भी संस्था या संगठन ने उनके इस महान कार्य का संज्ञान नहीं लिया जो दुर्भाग्यपूर्ण है।

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