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जौनपुर में जागड़ा पर्व की धूम दूर दराज से पहुँच रहे है लोग

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विजय खंडूड़ी

टिहरी (धनोल्टी) : अपने लोक संस्कृति के लिए प्रसिद्ध जौनपुर ब्लाक के ग्राम ख्यार्शी ललोटना टिकरी लगडासु बिरोड अग्यारना में इन दिनों जागड़ा पर्व की धूम मची हुई है मान्यता है कि धार्मिक पर्व जागड़ा राजा रघुनाथ देवता की पूजा अर्चना के रूप में मनाया जाता है। इस पर्व की संध्या कालरात्रि के रूप में मनाई जाती हैं इसके बाद दूसरे दिन भव्य रुप से सभी देवी देवता मण्डाण में पशुवा पर अवतरित होते हैं और दूर दराज से जागड़ा के लिए पहुँचे नाते रिस्तेदारी के लोग आपस मे मेल मिलाप करते हुए राँसू नृत्य के साथ देव वन्दना गा कर देवता की स्तुति करते है और क्षेत्र की सूख समृद्धि की कामना करते है । गाँव मे देर रात तक देवी देवता अवतरित होकर नंगी पीठ पर लोहे की सांट (लोहे की बनी चेन नुमा) से मारते है बताया जाता है कि द्वापर युग में भगवान श्री राम ने अपने भक्तों के रक्षा के लिए जगह जगह अपने धाम चुने जिसमें कहा जाता है कि पहला मंदिर राजा रघुनाथ जी का कश्मीर में हैं उसके बाद हनोल में है जो कि जौनसार मैं पड़ता है जो कि महासू देवता के नाम से जाना जाता है । भगवान रघुनाथ जी इस क्षेत्र में आराध्य देव के नाम से माने जाते है बर्षो पुरानी मान्यता है कि उस गांव की ध्याण( व्याही बेटी बहन )जो दूसरे जगह अपने ससुराल में रहती हैं और अगर उसके ससुराल में किसी भी प्रकार की परेशानी उसके परिवार में बच्चों को दुख बीमारी होती हैं तो वह ध्याण अपने देवता का सुमिरन करके आह्वान करती हैं और मन्नतें माँगती है। भगवान रघुनाथ से अपनी और अपने परिवार की सुख समृद्धि हेतु आराधना करती है जिसके बाद रघुनाथ उनकी रक्षा के लिए उनके ससुराल तक जाते हैं। और बदले में उन धियाणियों (व्याही बहन बेटियों )की मन्नत पूरी होने के बाद सभी बहन बेटी इस जांगड़े में अपने मायके वाले मंदिर पर शरीक होकर भगवान राजा रघुनाथ के लिए चढ़ावा छत्र श्रीफल या वस्त्र आदि लेकर पहुंचती है और पूजा अर्चना कर आशीर्वाद लेती है। कह जाता है कि जब राक्षसों का बहुत प्रकोप बढ़ गया था जिस रूप में भगवान राम ने राक्षसों का संहार किया था उसे महाशिव देवता के अर्थात महासू के नाम से भी जाना जाता है। और हमारे उत्तराखंड गढ़वाल की भाषा में इन देवता का नाम महासु देवता भी कहा जाता है। जगाड़े के दिन भगवान राजा राम नाथ की डोली को स्नान कराया जाता है। उसके पश्चात पूरे ग्राम सभा में सभी देवताओं का भ्रमण होता है और समापन में फल फूल श्रीफल ,छत्र, प्रसाद चढाया जाता है और बारी बारी से गाँवों मे जगाड़े का आयोजन होता है और इन दिनो नई फसल की उपज से माहौल और भी सुन्दर बन जाता है।

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