Home अभी-अभी 18 लाख के शौचालय पर अस्तित्व का खतरा,सुरक्षा ब्लॉक भी धराशाही

18 लाख के शौचालय पर अस्तित्व का खतरा,सुरक्षा ब्लॉक भी धराशाही

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जय प्रकाश बहुगुणा

बड़कोट : चार धाम यात्रा शुरू होने से पूर्व ही उत्तर भारत के पहले स्मार्ट शौचालय के अस्तित्व पर खतरे के बादल मंडराने लगे हैं।स्मार्ट शौचालय की सुरक्षा के लिए जो सी सी ब्लॉक नगर पालिका परिषद बड़कोट द्वारा बनाये गए थे वे बिन बरसात ही भरभरा कर गिर गए।उत्तर भारत का पहला स्मार्ट शौचालय शुरू होने से पहले ही ख़तरे जद में आ गया है ।आपकों बता दें कि यहां चौकानें वाली बात यह है कि 18 लाख की लागत से निर्मित ई टॉयलेट को बने आज एक वर्ष का समय भी पूरा नहीं हुआ की शौचालय विवादों में पहले ही बन गया है आपको बता दे कि शौचालय उत्तर भारत का एक मात्र स्मार्ट शौचालय है।इसका निर्माण तब हुआ था जब स्थानीय निकाय में प्रशासक नियुक्त थे।

बे मौसम बरसात व भू -स्खलन के चलते ये शौचालय उपलब्धि से पहले ही विवादों में आ गया है ।बता दें कि राज्य में नगर निकाय चुनावों की आचार संहिता के दौरान इस शौचालय को नगर पालिका प्रशासन के द्वारा शौचालय का निर्माण कार्य करवाया गया था ।जिसे नगर पालिका बड़कोट स्थित यमुनोत्री व गंगोत्री धाम को जाने वाले मार्ग के दोबाटा में बरसाती गधेरे के पास गलत जगह चिन्हित करके बनाया गया है ।
नगर पालिका प्रशासन ने इतनी ज्यादा लागत से बिना बिना किसी तकनीकी ज्ञान से भूमि चयन कर 18 लाख रुपये की रकम ठिकाने लगाने का काम किया है ।
वर्तमान स्थिति ये है कि यात्रियों को शौचालय की हाई टेक सुविधा देने से पहले से ही ये 18 लाख की लागत से बना स्मार्ट शौचालय व शौचालय की सुरक्षा के लिए दिए गए 4 लाख रुपये की सी0सी0 ब्लॉक भी चंद दिनों में भूस्खलन की जद में आ गया साथ ही शौचालय में एंट्री के लिए बने 2 रुपये व 5 रु रुपये के क्वाइन बॉक्स भी सरारती तत्वों के द्वारा नष्ट कर दिये गए हैं ।इस सम्बंध में जब नगर पालिका परिषद बड़कोट की अध्यक्ष से बात की गई तो अध्यक्ष श्रीमती अनुपमा रावत ने कहा कि उपरोक्त कार्य मेरे कार्यकाल से पूर्व ही करवाया गया है।हम इसकी तकनीकी जांच करवाकर कार्यवाही करेंगे।
मामले में ख़ुद अधिशासी अधिकारी नगर पालिका बड़कोट कहती हैं कि शौचालय के निर्माण कार्य से पूर्व स्थान का तकनीकी प्परीक्षण नहीं किया गया था जिसके कारण 18 लाख रुपये की लागत से बने शौचालय और शौचालय की सुरक्षा के लिए लगभग 4 लाख की लागत से सी 0सी0 ब्लॉक भरे गए थे जोकि एक महीने में ही धराशाही हो गए हैं ।
जो स्थानीय लोगों के नजरों सरकारी धन का सरासर दुरपयोग माना जा रहा है ।स्थानीय लोगों का पालिका प्रशासन पर आरोप है कि इस शौचालय के निर्माण कार्य से पूर्व न कोई तकनीकी भूमि परीक्षण किया गया और न तकनीकी रूप से स्थान का चयन किया गया था ।और ऐसे स्थान जंहा
बरसाती गधेरे शुरू होने से पहले ही शौचालय धराशाही होने के स्थिति में आ गया है । ऐसे स्थान पर 18 लाख रुपये की लागत से उत्तर भारत का पहला स्मार्ट शौचालय बनवाया गया है जो सरकारी धन का सरासर दुरुपयोग है।

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