Home अभी-अभी ‘‘स्वछता, स्वास्थ, समर्थता तथा सम्पन्नता’’ को मूल मंत्र बना कर प्राप्त होंगे...

‘‘स्वछता, स्वास्थ, समर्थता तथा सम्पन्नता’’ को मूल मंत्र बना कर प्राप्त होंगे सम्पूर्ण सवच्छता का लक्ष्य: मुख्यमंत्री

49
0
SHARE

अरविन्द सेमवाल

देहरादून : राज्य के शहरी विकास निदेशालय द्वारा राज्य के समस्त 90 शहरी निकायों को आगामी ‘‘स्वच्छ सर्वेक्षण – 2020’’ की और भी बेहतर तैयारियां करवाने के लिए एक क्षेत्रीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री, मंत्री शहरी विकास, सचिव शहरी विकास, राष्ट्रीय मिशन निदेशक तथा संयुक्त सचिव  भारत सरकार नवीन कुमार जिंदल तथा निदेशक शहरी विकास द्वारा स्वच्छता सर्वेक्षण – 2019 में बेहतर प्रदर्शन करने वाले नगर निगम, नगर पालिका परिषद तथा नगर पंचायतों के महापौर, अध्यक्षों को ‘‘अटल निर्मल नगर’’ पुरस्कारों से पुरस्कृत किया गया। इसके अतिरिक्त तत्कालीन नगरायुक्त तथा अधिशासी अधिकारीगणों को भी सम्मानित किया गया। साथ ही नगर निकायों हेतु अपशिष्ट प्रबंधन के नियमों तथा शासनादेशों को संकलित कर निर्मित हैंडबुक का अनावरण भी किया गया।

इस मौके पर मुख्यमंत्री त्रिवेद्र रावत ने अपने संबोधन में कहा कि, राज्य का 70 प्रतिशत से भी ज्यादा हरित क्षेत्र है। देश का ऑक्सीन सिलेण्ड हमारा उत्तराखण्ड है। हमारा राज्य देवभूमि कहलाता है इसलिए स्वच्छता को भी हम धर्म की तरह निभाते हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री भारत वर्ष को स्वच्छ एवं स्वस्थ बनाने की ऐतिहासिक मुहिम छेड़ी गयी है। स्वच्छता के प्राथमिक एजेण्डा को लेकर प्रारम्भ किए गए अखिल भारतीय मिशन यानि स्वच्छ भारत मिशन की शानदार सफलता को देखते हुए प्रधानमंत्री ने इस अभियान के अगले चरण को लोच किया गया है। इस चरण में देष को ‘‘सिंगल यूज प्लास्टिक’’ से मुक्त कराने की मुहिम छेड़ी गयी है। यहां उपस्थित राज्य के समस्त नगर निकायों की जुझारू टीम के समर्पण के आधार पर मैं प्रधानमंत्री को यह भरोसा दिलाना चाहता हूं कि देश को ‘‘सिंगल यूज प्लास्टिक’’ से मुक्त कराने की मुहिम में उत्तराखण्ड राज्य बढ़-चढ़ भागीदारी करेगा। उन्होंने कहा कि यह अत्यधिक हर्श का विशय है कि उत्तराखंड राज्य ने ‘‘सिंगल यूज प्लास्टिक’’ के खिलाफ पूर्व से ही मुहिम छेड़ रखी है। राज्य में पूर्व से ही प्लास्टिक तथा थर्मोकोल से बने डिस्पोजबलस् प्रतिबंधित किए गए हैं। मुझे अवगत कराया गया है प्रतिबंधित प्लास्टिक का प्रयोग करने वालों से लगभग एक करोड़ रुपए का जुर्माना वसूला गया है। इसी प्रकार निकायों द्वारा कूड़े से छंटाई कर रिसाईकलेवल पदार्थों की बिक्रि कर लगभग 75 लाख रुपए का राजस्व अर्जित किया गया है। प्रतिबंधित प्लास्टिक के खिलाफ इस प्रकार की कार्यवाहियों से धीरे-धीरे ही सही पर जागरूकता बढ़ रही है। प्लास्टिक कचरे को कम करने की दिशा में प्राप्त की गई उपलब्धि के लिए मिशन से जुडे समस्त अधिकारीगण, कर्मचारीगण, गैरसरकारी संस्थान समेत प्रदेश की प्रबुद्ध जनता बधाई की पात्र है। विशेषकर पत्रकार बंधु जिन्होंने अपने समाचार पत्रों एवं मिडिया चैनलों में स्वच्छता के विशय को प्रमुखता से संबोधित किया है। प्रधानमंत्री जिस भी काम को हाथ लेते हैं तो वह आंदोलन बन जाता है। पर जनता को उस आंदोलन में जोड़ना हमारा काम है।

इस अवसर पर स्वच्छता से संबंधित उद्योगों के संबंध विभिन्न कम्पनियों द्वारा अपने पदार्थों की प्रदर्शनी भी लगाई गई। इस दौरान मुख्यमंत्री के आह्वान पर गोयनका इलेक्ट्रिक मोटर वेह्कल प्राईवेट लि0 के संजय कुमार द्वारा नगर निगम देहरादून को एक ई-रिक्षा भेंट भी किया गया।

इस अवसर पर स्वागत संबोधन देते हुए सचिव शहरी विकास, शैलेश बगौली ने कहा कि मानवता के विकास के शुरूआती दिनों में नदियों के संगम स्थलों पर लगने वाले हाट बाजारों से लेकर 21वीं शताब्दी के अत्याधुनिक शहरों के विकास तक, यह स्पश्ट है कि शहर और शहरीकरण मानव प्रगति के मानक रहे हैं। तेजी से हो रहे शहरीकरण के चलते शहरी जीवन को स्वच्छ एवं स्वास्थ्यप्रद बनाना ही शहरी विकास विभाग के लिए सबसे बड़ी चुनौती है। विभाग की ओर से इस दिषा में अलग – अलग मोर्चों पर कई कार्य किये जा रहे हैं। संयुक्त सचिव, भारत सरकार, नवीन कुमार जिंदल ने कहा कि बिना जनता के सहयोग के, एक हजार गांधी या मोदी भी देश को देश को स्वच्छ नहीं बना सकते। जहां तक क्या करें का सवाल है तो उत्तर सिर्फ इतना सा है कि हमें अपने -अपने घरों, संस्थानों, प्रतिस्ठानों का कूड़ा पृथक करना ही एक और एक मात्र समाधान है।

उत्तराखण्ड राज्य की प्रगति के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा कि ओडीएफ सीटी/पीटी बेहतर है पर कूड़े का प्रसंस्करण अभी मात्र 40 प्रतिषत ही हो रहा है जो कि राष्ट्रीय औसत 60 प्रतिशत से कम है। 4 बड़े नगर निगमों में भी अभी प्रसंस्करण सुविधा विकसित नहीं हो पाई है। उन्होंने कहा कि स्वच्छता एप को लागू कर मोनिटरिंग बेहतर की जा सकती है। सी एण्ड डी वेस्ट को प्रस्कृत कर ठोस अपशिष्ट में ना मिलाया जाए। स्वच्छ सर्वेक्षण में अच्छी रेंकिग नहीं आने पर भी उनके द्वारा चिंता व्यक्त की गई। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री जी के आह्वान पर मेन्युवल स्कवेंजिंग और सीवर में होने वाली दुर्घटनाओं को शून्य किया जाना अब हमारा अगला लक्ष्य है। मंत्री नगर विकास, मदन कौशिक ने कहा कि स्वच्छ सर्वेक्षण के बारे में अध्यक्ष तथा महापौर जरूर ध्यान से समझने का कष्ट करें ताकि हमारे शहर बेहतर रैंकिंग प्राप्त कर पाएं। सर्वेक्षण में अच्छे अंक प्राप्त करने के लिए हम भी बेहतर प्रयास कर रहे हैं पर कुछ तकनीकी चीजें सीखने की कमी है, जिसे इस कार्यषाला में सीखने की आवष्यकता है। अन्यथा हमारे शहर भी इंदौर या भोपाल जैसे ही प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि निकायों को पैसे की कमी नहीं है। सरकार द्वारा निकायों को प्रदान किए जाने वाले अनुदान को तीन गुना तक बढ़ा दिया गया है। मेरा अनुरोध है कि अध्यक्षगण स्वच्छता को अपने चुनाव का एजेण्डा बनाए। देहरादून के मेयर सुनील उनियाल ‘गामा’ द्वारा प्लास्टिक को लेकर जो अभियान लिया गया है उसकी तारीफ करते हुए उन्होंने व्यापार संघ की बात हो या शिक्षक संघ की बात हो या अन्य सामाजिक संगठनों को इस अभियान से जोड़ने का आह्वान किया।

इस मौके पर तीन श्रेणियां नगर निगम, नगर पालिका परिशद व नगर पंचायत में शीर्श तीन स्थान प्राप्त करने वाले निकायों को पुरस्कृत किया  गया। जिसमें नगर निगम रुड़की को 20 लाख का चैक, ट्रोफी तथा एक करोड़ मूल्य तक के स्वच्छता अवस्थापना विकास के कार्यों के प्रस्तावों हेतु तत्काल स्वीकृति। नगर निगम काशीपुर को 15 लाख का चैक, ट्रोफी तथा 75 लाख मूल्य तक के स्वच्छता अवस्थापना विकास के कार्यों के प्रस्तावों हेतु तत्काल स्वीकृति। नगर निगम हल्द्वानी को 10 लाख का चैक, ट्रोफी तथा 50 लाख मूल्य तक के स्वच्छता अवस्थापना विकास के कार्यों के प्रस्तावों हेतु तत्काल स्वीकृति। नगर निगम रुड़की, के तत्कालीन नगरायुक्त अशोक कुमार पाण्डे जो कि वर्तमान में शहरी विकास निदेशालय में अपर सचिव पद पर तैनात हैं, नगर निगम काशीपुर, के तत्कालीन नगरायुक्त हिमांशु खुर्राना जो कि वर्तमान में पौड़ी के सी0डी0ओ0 हैं तथा नगर निगम हल्द्वानी, के तत्कालीन नगरायुक्त आयुक्त चन्द्र सिंह मर्तालिया वर्तमान में भी हल्द्वानी के नगरायुक्त हैं, को भी सम्मानित किया गया। नगर पालिका परिषद श्रेणी में नगर पा0प0 मुनि-कि-रेती को 15 लाख का चैक, ट्रोफी तथा एक 75 लाख मूल्य तक के स्वच्छता अवस्थापना विकास के कार्यों के प्रस्तावों की मंजूरी।नगर पा0प0 गौचर को 10 लाख का चैक, ट्रोफी तथा 50 लाख मूल्य तक के स्वच्छता अवस्थापना विकास के कार्यों के प्रस्तावों की मंजूरी।नगर पा0प0 चमोली-गोपेष्वर को 7 लाख का चैक, ट्रोफी तथा  30 लाख मूल्य तक के स्वच्छता अवस्थापना विकास के कार्यों के प्रस्तावों की मंजूरी।न0पा0प0 मुनि-कि-रेती के अधिशासी अधिकारी बद्रीप्रसाद भट्ट, गौचर के राधेश्याम छाछर, और चमोली-गोपेश्वर के अनिल कुमार पंत को भी सम्मानित किया गया। नगर पंचायतों में नगर पा0प0 गौचर को 10 लाख का चैक, ट्रोफी तथा 50 लाख मूल्य तक के स्वच्छता अवस्थापना विकास के कार्यों के प्रस्तावों की मंजूरी।नगर पा0प0 गजा को 8 लाख का चैक, ट्रोफी तथा 30 लाख मूल्य तक के स्वच्छता अवस्थापना विकास के कार्यों के प्रस्तावों की मंजूरी।नगर पा0प0 शक्तिगढ़ को 5 लाख का चैक, ट्रोफी तथा 20 लाख मूल्य तक के स्वच्छता अवस्थापना विकास के कार्यों के प्रस्तावों की मंजूरी।नगर पंचायत अगस्तयमुनि के अधिशासी अधिकारी हरेन्द्र सिहं चैहान, गजा के दिनेश कृशाली, और शक्तिगढ़ के सरिता राणा को भी सम्मानित किया गया। इस मौके पर मुख्यमंत्री महोदय द्वारा अपने नगरों को प्लास्टिक फ्री करने वाले निकायों हेतु विशेष प्रोत्साहन पुरस्कारों की घोषणा की। देश के शीर्श 100 नगरों में स्थान बनाने वाले तीन शीर्श नगर निगमों के लिए एक करोड, 75 लाख तथा 50 लाख के पुरस्कारों की घोषणा की गयी। स्वच्छ सर्वेक्षण – 2020 में प्रदेश में प्रथम तीन स्थानों पर आने वाले नगर पालिका परिशदों तथा नगर पंचायतों को दिए जाने वाले  20 लाख, 15 लाख तथा 10 लाख के पुरस्कारों को तीन गुना किया जाएगा।स्वच्छ सर्वेक्षण – 2020 में प्रदेष में प्रथम तीन स्थानों पर आने वाली नगर पंचायतों को दिए जाने वाले 20 लाख, 15 लाख तथा 10 लाख के पुरस्कारों को भी तीन गुना किया जाएगा।

नगर निकायों को आर्थिक सुदृढ़ता प्रदान करने हेतु निकायों को राज्य वित्त आयोग तथा 14वें वित्त आयोग से प्रदत्त वित्तीय सहयोग को लगभग ढ़ाई गुना किया जा चुका है।जनपद स्तर पर जिलाधिकारियों को स्वच्छता संबंधी गतिविधियों तथा आधारभूत ढांचे के विकास हेतु सीधे तौर पर जवाबदेह बनाते हुए स्वच्छता की मुहिम से जोड़ा गया है। ठोस अपशिष्ट का वैज्ञानिक प्रबंधन सुनिश्चत करवाने हेतु डी0पी0आर0 गठन के कार्य के लिए संस्थागत सहयोग प्रदान किया जा रहा है। इस प्रकार लगभग 68 निकायों की ठोस अपशिष्ट प्रबंधन डी0पी0आर0 गठित की जा चुकी हैं।22 ऐसे निकायों, जिनमें ठोस अपशिष्ट प्रबंधन हेतु भूमि की उपलब्धता की समस्या है, के लिए जिला प्रशासन, स्थानीय निकाय तथा वन विभाग की समन्वित प्रयासों का मूल्यांकन सीधे मुख्य सचिव स्तर पर किया जा रहा है। सरकार एवं शासन के शीर्श स्तर से ही अपशिष्ट प्रबंधन गतिविधियों को ‘‘कह कर करने’’, के बजाए ‘‘कर के कहा’’ जा रहा है। सोर्स सेग्रीगेशन हेतु  मुख्यमंत्री महोदय द्वारा मुख्यमंत्री आवास में जैविक अपशिष्ट से कम्पोस्ट बनाने का कार्य प्रोत्साहित किया गया है।देहरादून के आई0ए0एस0/अधिकारी आवास कोलोनी में भी जैविक अपशिष्ट से कम्पोस्ट बनाई जा रही है। मैं स्वयं भी यह कार्य कर रहा हूं।मुख्य सचिव महोदय द्वारा निर्गत आदेशों के अनुसार राज्य के समस्त निकायों में स्थित समस्त सरकारी कोलोनियों में सोर्स सेग्रिगेशन तथा जैविक अपशिष्ट से कम्पोस्ट बनाने को अनिवार्य किया जा चुका है। वहीं सिंगल यूज प्लास्टिक मुक्त राज्य बनाने हेतु राजधानी स्थित सचिवालय तथा अन्य कार्यालयों में ‘सिंगल यूज प्लास्टिक’, पैट बोतल, डिस्पोजेबल तथा कैरी बैग प्रतिबंधित किए जा चुके हैं। तकरीबन 21 स्थानों पर प्लास्टिक कोम्पेक्टर पूर्व से ही स्थापित हैं इसके अलावा कुल 47 स्थानों पर प्लास्टिक कोम्पेक्टर की स्थापना चिन्हित की गई है। ठोस अपशिष्ट प्रबंधन को सूचारू रूप से चलाने के लिए 97 नगर निकायों द्वारा User Charges बायलॉज Notify करा लिए गये हैं। इस बार स्वच्छ सर्वेक्षण – 2020 लगातार पांचवां स्वच्छ सर्वेक्षण है। इस साल सर्वेक्षण पहले से भिन्न है। यह तिमाही तौर पर किया जा रहा है और लगभग पूरे वर्शभर संचालित हो रहा है। पहली तिमाही जो कि अप्रैल से संचालित है, में ऑनलाईन एम0आई0एस0 (मैनेजमेंट इन्फॉरमेशन सिस्टम) के तहत मोनिटरिंग की जा रही है। इसे ‘‘स्वच्छ सर्वेक्षण लीग’’ कहा गया है। स्टोर रेटिंग फॉर गार्वेज फ्री सिटीज, ओ0डी0एफ0 प्लस तथा प्लस प्लस इत्यादि के प्रमाणपत्र भी आवश्यक होंगे।जनता के साथ बेहतर कनेक्ट भी बेहद जरूरी है। अन्यथा जब पर्यवेक्षक आऐंगे तो उस समय उन्हें नगरों की जनता की नाराजगी संप्रेशित होगी।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here