Home अभी-अभी सबको स्वास्थ्य सुविधा का दावा खंडहर बने अस्पतालों से कैसे होगा पूरा।

सबको स्वास्थ्य सुविधा का दावा खंडहर बने अस्पतालों से कैसे होगा पूरा।

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कपिल मलिक

टिहरी : एक ओर जहां उत्तराखंड सरकार प्रदेश के नागरिकों को स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने के लिए गोल्डन कार्ड बनाने का दम भर रही है वहीं दूसरी ओर सरकारी अस्पतालो का बुरा हाल है। ऐसा ही एक अस्पताल पर्यटक स्थल धनोल्टी में है। जो कि एक मकान के जर्जर ओबरे अर्थात गौशाला में चल रहा है। जो सरकारी अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवा की हकीकत बताने के लिए काफी है।

राजकीय स्वास्थ्य उपकेंद्र धनोल्टी जो खंडहर में चल रहा है वहां जाने से पहले आदमी दस बार सोचता है कि अंदर जाउं या न जाउं। क्यों कि भवन की स्थिति देखकर यहां आने वाले रूग्णं लोगों को यह लगता है कि बिमारी से तो बच जायेगे कही अंदर चले गये तो कहीं मर न जाएं। लेकिन ग्रामीण करें भी तो क्या। मजबूरी में उन्हें छोटे मोटे रोगों के लिए जाना ही पड़ता है। हालात यह हैं कि इसमे ंबिजली तक नहीं है। बाहर से आने वाले को अंदर चिकित्सक भी नजर नहीं आता। राजकीय ऐलोपैथिक चिकित्सालय धनोल्टी दो खंडहर नुमा गौशालाओं में चल रहा है एक में चिकित्सक रोगियों की जांच करता है व दूसरे में मरहम पटटी या रोगी को रखा जाता है। चिकित्सालय में बिजली, पानी व शौचालय की कोई व्यवस्था भी नहीं है। चिकित्सालय के दरवाजे खिड़कियां सभी गल कर टूट चुकी हैं। चिकित्सालय में रोगियों को बैठने के लिए कोई व्यवस्था नही है। बारिश होने पर कमरों में पानी भर जाता है व दवाइयां सीलन से खराब हो जाती है। यहाँ पर एक चिकित्सक तैनात है वह भी यहां से भागने की फिराक में लगी है। एक ओर सरकार कहती है कि अस्पतालों में चिकित्सकों की व्यवस्था की जा रही है। वहीं दूसरी ओर अस्पताल खंडहर में चलेंगे व चिकित्सकों को कोई सुविधा नहीं मिलेगी तो चिकित्सक कैसे टिकेंगे। धनोल्टी व्यापार संघ के अध्यक्ष रघुवीर रमोला का कहना है कि धनोल्टी क्षेत्र के करीब चालीस गांव इस अस्पताल पर निर्भर हैं लेकिन हालात यह हैं कि अस्पताल किराये के एक गौशाला में चल रहा है जहां कोई भी सुविधा नहीं है। क्षेत्र के कुलदीप नेगी ने कहा कि यह नाम मात्र का अस्पताल है यहां पर मामूली रोग का भी उपचार नहीं हो पाता लोग यहां आने से डरते हैं भवन इतना जर्जर है कि वहां जाने में भी डर लगता है। स्थानीय निवासी श्याम सिंह ने कहा कि धनोल्टी में नये अस्पताल का निर्माण कार्य चल रहा है लेकिन दो साल से अभी तक अधूरा पड़ा था अब कार्य लगभग पूरा हो चुका है लेकिन  अभी तक अस्पताल विभाग को हैंड ओवर नहीं किया गया जबकि नया भवन तैयार हो गया है। अस्पताल में तैनात डा. नूपुर कटियार का कहना है कि उन्हें तो नौकरी करनी है इसलिए यहां आये हैं लेकिन ऐसे में अधिक समय तक यहां रहा नहीं जा सकता। क्यों कि कई बार सीएमओ को अवगत कराया जा चुका है कि नये अस्पताल में इसे स्थानांतरित कर दिया जाय लेकिन अभी तक यह नहीं हो पाया वहीं यहां बैठना भी किसी खतरे से खाली नहीं है बरसातों के दिनों में यहां भारी बारिश में पानी आता है सारी दवाइयां भी खराब हो जाती हैं।

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