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रोटरी ने स्वरोजगार के लिए युवाओं को प्रेरित करने को कार्यशाला का आयोजन किया।

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बिजेंद्र पुंडीर

मसूरी : रोटरी क्लब मसूरी ने एमपीजी कालेज के बच्चों को कैरियर काउंसलिंग के माध्यम से स्वरोजगार करने व पलायन को रोकने के बारे में विस्तार से वक्ताओं ने बताया। इस मौके पर बच्चों ने भी वक्ताओं से सवाल किए व अपनी जिज्ञासा शांत की।

कैमल्स बैक रोड स्थित एक होटल के सभागार में आयोजित कैरियर काउंसलिंग के माध्यम से वक्ताओं ने अपने कार्यक्षेत्र के बारे में विस्तार से बताया व युवाओं को स्वरोजगार के लिए प्रेरित किया। मशरूम गल्र्स दिव्या रावत ने युवाओं से कहा कि वे अपने अंदर आत्मविश्वास, पैदा करें व लक्ष्य तय कर  उसे हासिल करने के लिए कड़ी मेहनत करें। उन्होंने बताया कि पहले अपने मन से झिझक को हटायें कि जो कार्य करने जा रहा हूँ उसमें सफलता मिलेगी या नहीं। ऐसा करने से केवल सोचते ही रह जायेंगे। जिस क्षेत्र में भी कार्य करना है उसमे मेहनत करें व दो तीन साल के अंदर आप समझ जायेंगे कि हमें आगे बढ़ने के लिए क्या करना है। क्यों कि युवाओं में जोश तो है लेकिन दिशा नहीं है उन्हें दिशा देने की जरूरत है। या कहें सही मार्ग दर्शन की जरूरत है। उन्होंने अपना उदाहरण दिया कि उन्होंने बड़े शहरों की चकाचैंध से छोटे शहरों व ग्रामीण क्षेत्रों में जाकर रोजगार की संभावना को तलाशा व मशरूम का उत्पादन शुरू किया तथा इस क्षेत्र में कड़ी मेहनत की और आज करोड़ो का व्यवसाय कर रही हूँ वहीं युवाओं को इस क्षेत्र में आने के लिए प्रेरित भी कर रही हूं व उनको प्रशिक्षण भी दे रही हूं। उन्होंने कहा कि वह युवा पीढ़ी को रास्ता दिखाना चाहती है और उसके लिए प्रोत्साहित व प्रेरित करती हैं।

इस मोके पर प्रदेश पलायन आयोग के उपाध्यक्ष शरत सिंह नेगी ने उत्तराखंड में पलायन के बारे में विस्तार से बताया व कहा कि सबसे अधिक पलायन पौड़ी व अल्मोड़ा से हुआ है। उन्होंने कहा कि पहाड़ की आबादी कम हो रही है व मैदानी क्षेत्र की आबादी बढ़ रही है। लेकिन पहाड़ों में महिलाओं की संख्या अधिक है जबकि पुरूष कम है पहाड़ों के गांव में 82 प्रतिशत लोग रहते हैं व मैदानी क्षेत्र में 57 प्रतिशत आबादी गांवों में है। पहाड़ों से पलायन का मुख्य कारण रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य व बुनियादी समस्यायें हैं। आज भी गांवों में महिलाएं सिर पर पानी, घास  लकड़ी ढोकर ला रही है। खेती काश्तकारों ने छोड़ दी है क्यों कि जंगली जानवर खेती को भारी नुकसान पहुचा रहे हैं। हिमाचल में प्रति व्यक्ति आय आठ हजार से अधिक है जबक उत्तराखं डमें चार हजार से थोड़ा अधिक है। हमारे उत्पादों की ब्रांडिंग नहीं है। खेती में उत्पादकता कम है, सिंचाई की सुविधा नहीं है, चकबंदी नहीं है। वही जलवायु परिवर्तन का प्रभाव भी कृषि पर पड़ा है। वहीं उन्होंने बताया कि कई संस्थायेे ग्रामीण क्षेत्रों के विकास के लिए प्रयास कर रही हैं जिसके सार्थक परिणाम आ रहे हैं इस तरह की योजनाएं बनानी होंगी ताकि यहां का युवा यहीं पर रोजगार कर सके या स्वरोजगार से जुड़ सके। इस मौके पर परेंद्र सकलानी ने कहा कि पहाड़ों में पशु पालन महत्वपूर्ण रोजगार का साधन हो सकता है इसके लिए प्रयास करने होंगे क्यो कि जब जंगली जानवरों के डर से खेती नहीं हो रही तो उसमें चारा उगांये जंगल जाने की भी जरूरत नहीं पड़ेगी। इस मौके पर अधिवक्ता आलोक मल्होत्रा ने छात्रों को अवगत कराया कि अगर कोई छात्र अधिवक्ता या जज के क्षेत्र में जाना चाहता है तो उसके लिए पांच व तीन साल का कोर्स है। जिसकी जानकारी वे किसी भी अधिवक्ता या क्लब से हासिल कर सकते है। इससे पूर्व कैरियर काउंसलिग सेल के चेयरमैन पूर्व आई जी मनोरंजन त्रिपाठी ने सभी का स्वागत किया व बताया कि कार्यशाला में एमपीजी के 50 से अधिक छात्रों ने प्रतिभाग किया। कार्यक्रम के अंत में मनमोहन कर्णवाल एवं रोटरी अध्यक्ष एसबी लाल ने सभी का आभार व्यक्त किया। इस मौके पर नीरज अग्रवाल, पूर्व विधायक जोत सिंह गुनसोला, पूर्व पालिकाध्यक्ष मनमोहन सिंह मल्ल, मीरा सकलानी, प्रमोद साहनी, सुविज्ञ सब्बरवाल, संदीप साहनी सहित रोटेरियन मौजूद रहे।

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