Home अभी-अभी रस्किन ने सादगी से मनाया जन्म दिन, प्रशंसको को आटोग्राफ दिए व...

रस्किन ने सादगी से मनाया जन्म दिन, प्रशंसको को आटोग्राफ दिए व जमकर फोटो खिंचवाये।

172
0
SHARE

कपिल मलिक

मसूरी : पद्मभूषण, पदमश्री लेखक रस्किन बोंड ने अपना 85वां जन्म दिन घर पर सादगी से मनाया। वहीं उनके प्रशंसक घर पर ही पहुंच गये व केक काटा तथा उपहार दिए। जिस पर उन्होंने आभार व्यक्त किया। वहीं अपराहन साढे तीन बजे मालरोड स्थित कैंब्रिज बुक डिपो में बच्चों के साथ जन्म दिन मनाया। इस मौके पर उन्होंने अपनी पुस्तकों पर आटोग्राफ भी दिए व फोटो भी खिंचवाये। इस मौके पर उन्होंने अपनी नई पुस्तक कमिंग अराउंड द माउंटेन का लोकार्पण पालिकाध्यक्ष अनुज गुप्ता एवं पूर्व पालिकाध्यक्ष मनमोहन सिंह मल्ल ने किया गया।

पद्मभूषण रस्किन बोंड ने 85वां जन्म दिन घर पर ही सादगी से मनाया। इस मौके पर बड़ी संख्या में प्रशंसक उनके घर पर ही पहुंच गये, व उनको जन्म दिन की बधाई दी। वहीं इस मौके पर उपहार भी दिए। कैंब्रिज बुक डिपो के स्वामी परिवार सहित उनके घर पहुंचे व रस्किन बोंड को उपहार दिए व घर पर केक काटकर जन्म दिन मनाया। इस मौके पर रस्किन बोंड ने जहां बच्चों को संदेश दिया कि वे पढ़ाई करें, कड़ी मेहनत करें व प्रतिस्पर्धा के युग में लक्ष्य हासिल करें। वहीं अपने पाठकों व प्रशंसको के लिए कहा कि वे स्वस्थ्य रहे, खूब खायें पियें व पढ़ते रहें। इस मौके पर रस्किन बोंड ने यह भी कहा कि वे अपने जन्म दिन पर एक पुस्तक का विमोचन करते हैं इस बार कमिंग अराउंड द माउंटेन का विमोचन कैंब्रिज बुक डिपो में किया। उन्होंने इस मौके पर कहा कि यह पुस्तक उनके जीवन से जुड़ी है। इस पुस्तक में आजादी मिलने के दौरान की कहानी है ज बवह छोटे थे व शिमला में रहते थे। बाल्यकाल से जुडी कुछ घटनाएं इस पुस्तक में हैं। उन्होंने बताया कि जब वह शिमला से अपने नाना नानी के घर देहरादून आये और वहां से मसूरी आये तो फिर मसूरी के ही होकर रह गये। उन्होंने कहा कि जीवन में खुश रहना चाहिए चाहे कितनी भी परेशानी क्यों न हो। इस मौके पर उनके पोते राकेश बोंड ने बताया कि दादा नियमित सुबह सात बजे उठते है तथा चाय पीने के बाद नहा धोकर अपने काम में लग जाते हैं। सुबह उठकर कुछ न कुछ लिखते हैं जब लिखने का मन नहीं करता तो गार्डनिंग करते हैं, अपना बिस्तर खुद लगाते व उठाते हैं तथा नाश्ते व खाने के बर्तन खुद किचन में रखते हैं। इस उम्र में भी अपना कार्य स्वयं करना बहत बड़ी बात है। उन्हेांने बताया की वह नाश्ता करने के बाद सो जाते हैं तथा शाम दिन में भोजन के बाद लिखते हैं। यह भी बताया कि आज भले ही कंप्युटर का युग है लेकिन वह हाथ से ही लिखते है। अभी तक 150 से अधिक पुस्तकें लिख दी है और हर साल तीन चार पुस्तकें लिखते हैं। उन्हेांने कहा कि उन्होंने कभी अपना जन्म दिन नहीं मनाया लेकिन अब उनके प्रशंसक आकर मनाते हैं मै तो जन्म दिन पर सोया रहना अधिक पंसंद करता हूं।

शाम को चार बजे रस्किन बांड जब मालरोड पर कैंब्रिज बुक डिपो पर आये तो वहां पर देश विदेश से आये सैकड़ो प्रशंसको के उत्साह व खुशी का आलम नहीं था जो तपती धूम में बारह बजे से लाइन लगा कर उनका इंतजार कर रहे थे। जैसे ही वह आये तो उन्होंने पुस्तकेां पर आटोग्राफ दिए व जमकर फोटो खिंचवाये। इस दौरान बुक स्टाल पर भारी भीड़ जमी रही।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here