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युवाओं महिलाओं एंव किसानों के लिए सगंध फूलों की खेती आर्थिकी का आधार।

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कपिल मलिक

मसूरी : डा. ओम प्रकाश दुग्गल ट्रस्ट एवं हिमालय ज्योति  समिति मसूरी के तत्वाधान में लेवेंडर एवं कैमोमाईल फूलों की खेती एवं व्यवसाय पर कार्यशाला का आयोजन किया गया जिसमें वक्ताओं ने कहा कि उत्तराखंड जैसे पर्वतीय क्षेत्रों में इसकी खेती से काश्तकार अच्छा पैसा बना सकते हैं व पलायन पर भी रोक लगाने में सहायक साबित होगा।

लाइब्र्रेरी स्थित दुग्गलविला में आयोजित कार्यशाला में बतौर मुख्य अतिेथि पालिकाध्यक्ष अनुज गुप्ता ने कार्यशाला का रीबनकाट व दीप प्रज्वलित कर शुभारंभ किया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि डा. ओमप्रकाश दुग्गल ट्रस्ट एवं हिमालय ज्योति समिति ने पहाड़ों से पलायन रोकने के लिए लेवेंडर एवं कैमामाईल फूलों की खेती के प्रति जागरूक करने के लिए जो कार्यशाला लगायी है वह निश्चित ही बेरोजगारों को रोजगार उपलब्ध कराने व पहाड़ की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में कारगर साबित होगी। उन्होंने कहा कि पहाड़ों में खेती न होने व रोजगार के साधन उपलब्ध न होने के कारण पलायन हो रहा है जिसे रोकने के लिए संगंध व औषधीय फूलों की खेती सहायक साबित होगी। इस मौके पर वरिष्ठ वैज्ञानिक एफआरआई डा. विजन वाष्र्णेय ने कहा कि इस कार्यशाला का उददेश्य उत्तराखंड के किसानो, युवाओ, छात्रों, महिलाओं में फूलों की खेती के प्रति प्रोत्साहित करना है। ताकि उनका आर्थिक विकास होने के साथ ही पलायन रूक सके व यहीं पर रोजगार का सृजन हो सके। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड 65 प्रतिशत वनों से आच्छादित है। यहां वनों में अनेक औषधीय पौधे है लेकिन उनका उपयोग नहीं हो पा रहा है, वहीं क्षेत्र दुर्गम होने व सीमित संसाधनों के चलते पलायन हो रहा है। उसे रोकने के लिए एरोमा टूरिज्म की ओर प्रोत्साहित करना होगा। कार्यक्रम में डा. ज्योति मारवाह ने कहा कि सुगंध का जीवन में विशेष महत्व है। और इस दिशा में उनकी संस्था प्राकृतिक औषधीय पौधों से तेल निकालने का कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि लोग केरला जाते हैं व वहां जाकर प्राकृतिक उपचार कराते हैं जबकि वहां के औषधीय पौधों में सुगंध नहीं है जबकि उत्तराखंड के हर औषधीय पौधे में सुगंध है। उन्होंने कहा कि लेवंडर एवं कैमामाइल फूलों की खेती कर यहां का किसान, युवा, युवतियां एवं महिलाएं रोजगार के साथ ही स्वरोजगार की दिशा में मील का पत्थर साबित हो सकता है। उन्होंने कहा कि डा. ओमप्रकाष दुग्गल चेरेटी लेवंडर एवं कैमामाइल फूलों की खेती के लिए मसूरी में प्रयास कर रहा हैै। इस औषधि का तेल मानसिक रोगी के उपचार, ब्लड प्रेशर, नींद न आना, आदि कई रोगों को उपचार कर सकता है। वहीं अरोमा थैरेपी स्किन केयर, कोस्मेटिक, साफट ड्रिंकस, बेकरी प्रोडेक्ट, आदि में भी इसका प्रयोग किया जाता है। वहीं देश विदेशों में भी इसकी भारी मांग है। जम्मू कश्मीर,विशाखपटटनम,एफआरआई आदि में इस ओर विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि यह पौधा बिना पानी की भूमि में होता है व 15 साल में एक बार लगाया जाता है वहीं एक किलो तेल बीस हजार से अधिक कीमत पर बिकता है। कार्यशाला को सहायक फूल अधिकारी जम्मूकश्मीर अर्जुन सिंह परिहार, सुश्री सानन सिंह, प्रोग्रेसिव किसान जम्मूकश्मीर भारत भूषण, आदि ने भी कार्यशाला को संबोधित किया। कार्यक्रम का संचालन हिमालय ज्योति समिति के निदेशक मनोज रावत ने किया। इस अवसर पर डा. ओमप्रकाश दुग्ग्ल पर सेनोपसिस आॅफ द बाॅयोग्राफी इन प्रेस, पुस्तक का लोकार्पण भी किया गया। अंत में देवांस दत्त ने सभी का आभार व्यक्त किया इस मौके पर रमेश चमोली, सभासद जसोदा शर्मा, निर्मला इंटर कालेज के प्रधानाचार्य ब्रदर अनूप,एडवोकेट संध्या ऐनी सहित सनातन धर्म गर्ल्स इंटर कालेज, मसूरी गर्ल्स इंटर कालेज, सेंटलारेंस हाई स्कूल, निर्मला इंटर कालेज के छात्र छात्राएं भी मौजूद रही।

 

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