Home अभी-अभी मिशाल –शिक्षा एवं नवाचार को साकार कर रही है ए शिक्षकाये

मिशाल –शिक्षा एवं नवाचार को साकार कर रही है ए शिक्षकाये

332
0
SHARE

जय प्रकाश बहुगुणा

उत्तरकाशी : जहाँ एक तरफ कुछ सरकारी स्कूलों में खानापूर्ति की शिक्षा हो रही है तो वहीं एक विद्यालय ऐसा भी है जहाँ की शिक्षकाये मिशाल कायम कर रही हैं।हर वर्ष नवाचार की दहलीज़ पर क़दम रखता एक उत्तरकाशी जिले की यमुनाघाटी का स्कूल राजकीय कन्या उच्च प्राथमिक विद्यालय डामटा भी है। यह स्कूल जिले की प्रगति एवम् अच्छी शिक्षा में अपना एक विशेष स्थान रखता है।
यमुनोत्री नेशनल हाइवे से लगे छोटे से क़स्बे डामटा में यह स्कूल स्थित है। सरकारी स्कूलों में गिरते नामांकन की बात जहाँ आजकल हो रही है वहीं हर वर्ष १०० से ऊपर छात्र संख्या रखकर यह स्कूल अपना परचम लहरा रहा है। वर्तमान सत्र में इस स्कूल में कुल १०२ छात्राएँ, ४ शिक्षिकाएं और दो भोजन माताएँ हैं।. शिक्षिकाएँ हर वर्ष स्कूल में नवाचारी गतिविधियों और सबसे अलग कुछ नया करने के लिए तत्पर रहती हैं।विषयों के गतिविधि पूर्ण प्रभावी शिक्षण के साथ विज्ञान मेला, इन्स्पायर अवार्ड, योगा, व्यायाम, खेल-कूद सांस्कृतिक कार्यक्रम इत्यादि पर भी इस स्कूल में विशेष ध्यान दिया जाता है। शिक्षिकाओं का मानना है कि बच्चे इक्स्पोज़र विज़िट से भी बहुत कुछ सिखते हैं। इस बात की ओर ध्यान देते हुए पिछले सत्र में शिक्षिकाओं द्वारा बच्चों को विज्ञान धाम देहरादून का भ्रमण कराया गया था।शायद यह शिक्षिकाओं के प्रयासों का ही नतीजा है कि हर वर्ष इस स्कूल के बच्चे ब्लॉक स्तर से लेकर राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में लगातार स्थान प्राप्त कर रहे हैं। अभी हाल की ही बात करे तो कक्षा 8वी की छात्रा नीतू का हरिद्वार में होने वाली राज्य स्तरीय योगा ओलम्पियार्ड में चयन हुआ है।
इस स्कूल की चारों शिक्षिकाएँ ख़ुद की सैलरी के कुछ अंश को जोड़ कर जहाँ बच्चों के सुनहरे भविष्य की नीव मज़बूत कर रही हैं वहीं स्कूल बजट को ख़ुद के योगदान से सुदृढ़ कर रही हैं। स्कूल टीम ने ख़ुद के प्रयासों और दृढ़ संकल्प से स्कूल के लिए लेजियम, साउंड सिस्टम, बच्चों के लिए ट्रैक सूट और इस साल एक प्रोजक्टर भी लिया है।स्कूल की प्रधानाचार्या दुर्गेश नंदिनी का कहना है कि मैं और मेरी साथी शिक्षिकाएँ बच्चों की अच्छी शिक्षा के लिए प्रयासरत हैं। इससे पहले हम शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया के लिए मोबाइल और टैब्लेट का उपयोग करते थे पर स्क्रीन साइज़ छोटा होने के कारण थोड़ा दिक्कत होती थी. इस समस्या के समाधान और शिक्षण को ओर प्रभावी बनाने के उद्देश्य से प्रोजक्टर ख़रीदने का विचार आया जो सभी स्कूल शिक्षिकाओं को अच्छा लगा।अभी कुछ दिन पहले देहरादून जाकर हमने स्कूल के लिए एक प्रोजक्टर लिया और इससे शिक्षण कार्य कर रहे हैं।
शिक्षिकाओं का स्कूल के प्रति समर्पण एक मिशाल से कम नहीं है।. यह भी एक राजकीय विद्यालय है जहाँ की शिक्षिकाएँ स्वयं के प्रयासों से सुनहरे भविष्य के सपने को साकार कर रही हैं। स्कूल की अन्य शिक्षिकाएँ सविता चमोली, उषा किरण बिष्ट और सुशीला राणा कहती हैं कि हमारा वजूद बच्चों से ही है। शिक्षा का उद्देश्य अच्छे नागरिक तैयार करना है और यह तभी सम्भव है जब अच्छे बच्चे तैयार हों।हम अपनी ओर से हर सम्भव प्रयास कर रहे ।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here