Home अभी-अभी महाराजा दलीप सिंह के जीवन के अनछुए पहलुओं पर प्रकाश डाला।

महाराजा दलीप सिंह के जीवन के अनछुए पहलुओं पर प्रकाश डाला।

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कपिल मलिक

मसूरी : पंजाब के आखिरी महाराजा दलीप सिंह के जीवन पर व्याख्यान देने मसूरी पहुंचे पीटर  बांन्स ने महाराजा दलीप सिंह के जीवन के अनेक अनछुये पहलुओं के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि महाराजा दलीप सिंह का मसूरी से गहरा संबध रहा है तथा वह यहां पर दो साल तक रहे व यहीं पर प्राथमिक शिक्षा ग्रहण की।

उन्होंने बताया कि पंजाब ब्रिटिश सरकार उन्हें मसूरी लाई व यहाँ पर ईसाई लोगों के बीच रखा व उन्हें गुपचुप तरीके से ईसाई बना दिया ताकि पंजाब में किसी को इसका पता न चले और उसके बाद उन्हें इंग्लैड ले गये। उन्होंने बताया कि उन्होंने महाराजा दलीप सिंह के बारे में विस्तार से जानकारी हासिल की, उनसे जुड़ी वस्तुओं का संग्रह किया, व छह पुस्तकें लिखी। उन्होंने पत्रकारो से बातचीत में बताया कि यह मसूरी के लिए ऐतिहासिक महत्व की विरासत है। वह यहां पर कैसल हिल में रहे जो सेंटजार्ज कालेज के समीप था। उस समय विश्व के ख्याति प्राप्त चित्रकार जार्ज बिची ने उनकी पेंटिंग बनाई व वायसराय लार्ड डलहौजी को भेंट की। जो विश्व की प्रमुख धरोहरों में हैं। उन्होंने बताया कि महाराजा दलीप सिंह मसूरी में रहे यहीं पर उन्होंने शिक्षा ग्रहण की, घुडसवारी व संगीत सीखा तथा क्रिकेट सीखा व खेला। दलीप सिंह गांधी चैक बैंड स्टैण्ड पर हर रोज बैंड सुनने आया करते थे। फिर 1854 में अंग्रेज उन्हें इंग्लैड ले गये। बाद में जब उन्हें 1887 में पता चला कि उन्हें बचपन में अंग्रेजो ने ईसाई बना दिया गया तो वह भारत आने लगे लेकिन उन्हें ब्रिटिश सरकार ने हिरासत में ले लिया जिस पर उन्होंने विद्रोह किया। लेखक पीटर बेंस ने बताया कि वह इंग्लैंड में ही पैदा हुए तथा पहली बार उन्हें महाराजा दलीप सिंह के बारे में 1994 में पता चला व इतिहास में रूचि होने के कारण उन्होंने इस दिशा में कार्य किया। व पहली बार 2001 में भारत आये। इस मौके पर सुरभि अग्रवाल ने बताया कि हेरिटेज सेंटर मसूरी विगत वर्षो से मसूरी के इतिहास व विरासत पर संग्रह व शोध का कार्य करने में सक्रिय है। तथा मसूरी के इतिहास पर विशेषज्ञों को विश्वभर से मसूरी में लाने, व ऐसी संगोष्ठियां  करवाता रहता है इसी कड़ी में महाराजा दलीप सिंह के बारे में व उनके मसरी से संबंध के बारे ेमें इंग्लैड से पीटर बैंन्स को बुलाया गया है। इसमें सहयोग के लिए उन्होने सेंटजार्ज के प्रधानाचार्य ब्रदर टॉमी बर्गीस का विशेष आभार व्यक्त किया जिन्होंने इस संवाद को अपने विद्यालय में कराने की अनुमति दी। इस कार्यक्रम में लाल बहादुर शास्त्री प्रशासनिक अकादमी के निदेशक संजीव चैपड़ा, महाराजा कपूरथला ब्रिगेडियर सुजीत सिंह, वुडस्टाक के प्रधानाचार्य डा. कुक, सहित कई इतिहास के जानकार व साहित्यकार मौजूद रहे।

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