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मसूरी : इतिहास जिम कार्बेट के जन्म दिवस पर उनकी वस्तुओं की प्रदर्शनी लगाई।

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कपिल मलिक

मसूरी : इतिहासकार गोपाल भारद्वाज ने महान शिकारी व उत्तराखंड को नरभक्षी बाघों से मुक्ति दिलाने वाले पशु प्रेमी जिम कार्बेट के 145 वे जन्म दिवस पर याद किया व गढवाल टैरेस सभागार में उनकी वस्तुओं की प्रदर्शनी लगाई।

प्रदर्शनी का उदघाटन पालिकाध्यक्ष अनुज गुप्ता ने किया व कहा कि मसूरी जहां पर्यटक स्थल है वहीं इसका ऐतिहासिक महत्व है। मसूरी में कई ऐतिहासिक व्यक्तियो ने जहां अपना जीवन बिताया वहीं मसूरी का नाम विश्व में किया। इनमें ख्याति प्राप्त जिम कार्बेट भी थे जिन्होंने उत्तराखंड को ब्रिटिश काल में नरभक्षी बाघों से मुक्ति दिलाई थी उनका मसूरी से गहरा संबंध रहा था। उन्होंने इतिहास कार गोपाल भारद्वाज की सराहना की कि उन्होंने उनके कुछ वस्तुओं को संजो कर रखा है। इस मौके पर गोपाल भारद्वाज ने बताया कि जिम कार्बेट नैनीताल में पैदा हुए लेकिन उनके माता पिता मसूरी में रहते थे। उनके पिता क्रिस्टोफर कार्बेट की शादी 1859 में लंढौर के सेंटपाल चर्च में मैरी जैनट के साथ हुई थी। उनके आठ भाई बहन थे उनके पिता यहां पोस्टमास्टर थे जब उनका स्थानांतरण 1870 में नैनीताल हो गया तो जिम कार्बेट का जन्म वहीं पर 25 जुलाई 1875 में हुआ। लेकिन उनका मसूरी से नाता बराबर बना रहा व कई बार मसूरी आये। उनके रिश्तेदार कर्नल पावल के यहां आते थे जो जनरल पावल जिन्होंने पूरे विश्व में स्काउट गाईड की स्थापना की थी। उन्होंने बताया कि उनके यहां कार्य करने वाली नर्स सलीवन ने उन्हें उनका दुर्लभ स्टोव, कुकर व सौ से अधिक फोटों के दुर्लभ नेगेटिव दिए जो जिम कार्बेट के अपने कैमरे से खींचे गये थे। वह उस जमाने के कुशल फोटोग्राफर भी थे उनके फोटो के नेगेटिव आज भी पूरी तरह सुरक्षित है। उन्होंने मसूरी के भी कई चित्र खींचे थे। इस मौके पर कर्नल सुनील गुप्ता सहित बड़ी संख्या में लोगों ने प्रदर्शनी का आनंद लिया।

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