Home अभी-अभी मतदान कम होने के कारणों पर चल रहा मंथन। कई कारण सामने...

मतदान कम होने के कारणों पर चल रहा मंथन। कई कारण सामने आये।

116
0
SHARE

कपिल मलिक

मसूरी : पर्यटन नगरी में मतदान के बाद अब चुनावी गणित शुरू हो गई है कि आखिर कम मतदान किसके पक्ष में गया। सभी अपनी अपनी गणित लगा रहे हैं। हालांकि परिणाम 23 मई को निकलेगा लेकिन सभी भाजपा व कांग्रेस अपनी जीत के प्रति आश्वस्त हैं। वहीं इस बात पर भी मंथन किया जा रहा है कि मतदान कम होने से किसको नुकसान हो सकता है।

इस बार पहाड़ों की रानी मसूरी का मतदाता घरों से बाहर नहीं निकला जिस कारण मतदान पचास प्रतिशत रहा जबकि 2014 के चुनाव में लगभग मतदान 62 प्रतिशत रहा था। इसके पीछे सभी अपने अपने तर्क दे रहे हैं। इस बार सबसे चिंतनीय विषय यह रहा कि मतदान केंद्रों पर मतदाता ढूढ कर भी नही मिल रहे थे। जिस तरह मतदान स्थल पर मतदाताओं को कोई परेशानी नहीं हुई उस हिसाब से मतदान अधिक होना चाहिए था। वहीं कांग्रेस व भाजपा का जो पंरपरागत वोट है वह भी घर से कम ही बाहर निकला। इस संबंध में सबकी अपनी अपनी राय है। कुछ लोगों का कहना है। कि मतदाताओं ने सोचा कि इस बार चुनाव आयोग ने भारी प्रचार प्रसार कर रखा है ऐसे में मतदाता अधिक आयेंगे और उन्हें घंटो लाइन में खड़ा रहना पडे़गा इसलिए मतदान करने ही नहीं आये। कुछ का कहना है कि इस बार मोदी लहर है वह जीत ही रहा है व कांग्रेस हार रही है ऐसे में मतदान करने क्या जाना। कुछ का मानना था कि कांग्रेस जीत रही है ऐसे में मतदान करने क्यों जाना। यह आंकलन तो आम आदमी का है जिन्हें पूरी जानकारी नहीं है।

लेकिन जिस तरह मतदान कम हुआ उसके पीछे अन्य कई प्रमुख कारण और भी हैं। सबसे बड़ा कारण मतदाताओं के नाम लिस्ट में न होना है। बहुत लोग आये जिनके पास वोटर आईडी तो थी लेकिन मतदाता  सूची में नाम न होने के कारण उन्हें एक नही कई बूथों में भटकना पड़ा। लेकिन उनका नाम नही मिला। कुछ ऐसे थे कि उनका नाम एक लिस्ट में नहीं था लेकिन कुछ के नाम अन्य बूथों की लिस्ट में थे लेकिन वे दूसरे बूथो पर नहीं गये व बिना मत दिए वापस लौट आये। कई मतदाताओं ने अपने वोट बनवाये व जरूरी कागज बूथ स्थल पर जाकर बीएलओ को दिए लेकिन उनका नाम मतदाता सूची में नही चढ़ा। जिससे उनमें निराशा हाथ लगी। क्यो कि जिन लोगों ने अपना वोट ऑनलाइन बनवाया उनका मत बन गया लेकिन जिन्होंने बीएलओ के पास दिए उनका मत नही बना। कुछ लोग मत देने इसलिए नहीं आये कि उनके पास चुनाव आयोग या राजनैतिक दलों की वह पर्ची नहीं पहुंची जिसमें उन्हें अपना नंबर देखने में आसानी होती। ऐसे मतदाताओं ने सोचा कि जब पर्ची नहीं आयी तो उनका नाम लिस्ट में नहीं होगा ऐसे में समय क्यों खराब किया जाय और लोग मतदान करने नहीं पहुंचे। इस पर सरकार व चुनाव आयोग को विशेष ध्यान देना चाहिए कि जब चुनाव आयोग हर किसी को मतदान करने के लिए प्रेरित कर रहा है तो अपने विभाग की कमियों को भी दूर किया जाना चाहिए।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here