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मई दिवस पर श्रमिकों ने रैली निकाली, न्यूनतम वेतन 18 हजार की मांग।

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कपिल मलिक

मसूरी : मई दिवस के अवसर पर यहां मई दिवस समारोह समिति के तत्वाधान में विभिन्न श्रमिक संगठनों ने रैली निकाली। जो लंढौर अनुपम होटल से लेकर गांधी चैक तक गई जहां आयोजित सभा में वक्ताओं ने श्रमिको का शोषण बंद करने तथा न्यूनतम वेतन 18 हजार करने सहित अन्य मांगेे सरकार से की।

लंढौर अनुपम होटल चैक से शुरू रैली में श्रमिक मई दिवस के शहीदों को लाल सलाम- लाल सलाम, मई दिवस का यह पैगाम, सबको रोटी सबको काम, दुनिया के मजदूरों एक हो, मजदूर एकता जिंदाबाद आदि के गगनभेदी नारों के साथ रैली निकाली। जिससे पूरा शहर लाल झंडों के आगोश में आ गया। रैली लंढौर बाजार, कुलड़ी, मालरोड होते हुए गांधी चैक तक गई जहां सभा आयोजित की गई। सभा को संबोंधित करते हुए श्रमिक नेताओं ने कहा कि आज के दिन अमेरिका के शिकागो शहर में आठ घंटे काम, आठ घंटे मनोरंजन एवं आठ घंटे आराम की मांग को लेकर आंदोलन किया था जिसमें कई श्रमिकों को शहादत देनी पड़ी थी। उनके बलिदान से आज श्रमिकों को आठ घंटे काम करने के बारे में निर्णय लेना पड़ा।  वक्ताओं ने कहा कि आज पूरे देश में श्रमिकों के हितों पर कुठाराघात हो रहा है। देश में पूंजीवाद उदारवादी नीति के कारण जन मानस का जीना दूभर हो गया है। केद्र सरकार श्रमिक विरोधी नीति अपना कर उद्योग पतियों के हित की नीति बना कर श्रमिकों का शोषण कर रही है। उनको अधिक लाभ पहुंचाया जा रहा है। श्रम कानूनों से छेड़छाड़ की जा रही है। उत्तराखंड सरकार भी होटल, स्कूल, दुकान कर्मचारियों के साथ अन्याय कर रही है कई बार श्रमिकों ने न्यूनतम वेतन 18 हजार करने की मांग की है लेकिन इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। इस मौके पर सरकार से मांग की गई कि उत्तराखंड में होटल, स्कूल, दुकान कर्मचारियों का न्यूनतम वेतन घोषित किया जाय, तथा वर्तमान की अधिसूचना को निरस्त कर न्यूनतम वेतन 18 हजार किया जाय। होटल स्वामियों को लीज पर होटल देना बंद किया जाय क्यों कि इसमें श्रमिकों का शोषण किया जा रहा है। ईएसआई एवं पीएफ सभी होटलों में लागू किया जाय, भवन निर्माण से जुडे श्रमिकों को ईएसआई से जोड़ा जाय, व आठ सौ रूप्या प्रतिदिन मजूदरी तय की जाय, मसूरी के रिक्शा, बोझा श्रमिकों के आवास जो पालिका ने तोड़े उन्हें अविलंब बनाया जाय तथा मालरोड पर चल रहे अवैध किराये के दुपहिया वाहनों व साइकिलों पर रोक लगाई जाय, जिन मजदूर आवासों पर कब्जा किया गया है उन्हें वापस मजदूरों को दिलाया जाय। आशा वर्कर, भोजन माताओं का आंगनवाडी कार्यकत्रियों की भांति मानदेय दिया जाय, आशा वर्करों का मानदेय अन्य स्कीम वर्करों की भांति अन्य राज्यों की तर्ज पर दिया जाय, भोजन माताओं को नौकरी से न निकाला जाय, आशा व भोजन माताओं को एनजीओ को न दिया जाय व उनका वेतन 18 हजार किया जाय। इस मौके पर नगर पालिकाध्यक्ष अनुज गुप्ता, कांग्रेस अध्यक्ष सतीश ढौडियाल, होटल वर्कर्स यूनियन के अध्यक्ष आरपी बडोनी, गाईड यूनियन के अध्यक्ष त्रेपन सिंह रावत, भवन निर्माण यूनियन के अध्यक्ष सलीम अहमद, सुनील कुमार, देवी गोदियाल, सीटू के सोबन सिंह पंवार, बिक्रम बलूड़ी, आदि मौजूद रहे।

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