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बड़कोट-कल से शुरू होंगे तीन पट्टियों में नाग देवता के मेले-जाने क्या खास है इन मेलों के नियम

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जय प्रकाश बहुगुणा

बड़कोट : उत्तरकाशी जिले की यमुनाघाटी में इन दिनों देवताओं के पौराणिक मेलों की धूम मची हुई है।हिमाचल से लगे सीमान्त विकास खण्ड मोरी से लेकर यमुनोत्री क्षेत्र तक बिभिन देवताओं के मेले चरम पर है।लेकिन भड़गाव पट्टी (तीन पट्टियों)जिनमे बड़कोट पट्टी, मुंगरसन्ति पट्टी व कमल सिराई पट्टी शामिल हैं में कल से होने वाले नाग देवताओं भुवनेश्वर(भौंसर)व पवनेश्वर(पौंसर) के मेले सभी से हटकर परम्परा से मनाए जाते हैं।पौंटी, मोलडा, हुडोली, पाणीगांव,नैलाड़ी, बिणाई,कनताड़ी, खानसी,पलेठा आदि गांवो में मनाए जाने वाले ये मेले शुद्ध शाकाहारी परिवेश में मनाए जाते हैं।जिन गांवो में नाग देवताओं के मेले होते हैं वहाँ मेले से दस दिन पहले से कोई भी ग्रामीण मीट, मांस, मदिरा का सेवन नही करते हैं।नाग देवताओं के पूरे थोक में सभी गांवो में मांस मदिरा पूर्णतः प्रतिबन्दित रहता है।ऐसी मान्यता है कि यदि किसी ने इस दौरान मांस मदिरा का सेवन किया तो उन्हें गम्भीर बीमारी या किसी अन्य मुसीबत का सामना करना पड़ता है।कभी कभी तो घरों में दूधिया रँग के सांप जोड़ो में निकल आते हैं।नाग देवताओं का जागरण दस दिन पूर्व शुरू हो जाता है।इनके दोनों थानो मोलडा व पौंटी में सुबह व शाम के समय ढोल नगाड़ों के साथ जागरण किया जाता है।हर साल नाग देवता एक ही बार अपने भक्तों को दर्शन देने के लिए मन्दिर से बाहर आते हैं।बाकी वर्षभर मन्दिर के पीड़ा में ही बिराजमान रहते हैं।जहां पौंटी व मोलडा के बहुगुणा लोग इनकी पूजा अर्चना करते हैं।पौंटी के सामाजिक कार्यकर्ता विनोद जैंतवान ने जानकारी देते हुए बताया कि इस वर्ष नाग देवताओं के मेलों के अवसर पर ग्राम सभा पौंटी में दो दिवसीय सांस्कृतिक कार्यक्रम व बहुउद्देश्यीय शिविर का आयोजन किया गया है।

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