Home अभी-अभी बैशाखी का पर्व धूमधाम से मनाया, गुरूद्वारों में विशेष कार्यक्रम व लंगर।

बैशाखी का पर्व धूमधाम से मनाया, गुरूद्वारों में विशेष कार्यक्रम व लंगर।

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कपिल मलिक

मसूरी : बैशाखी का पर्व पहाड़ों की रानी मसूरी में धूमधाम से मनाया गया इस मौके पर लोगों ने अपने घरों में पूजा अर्चना की वहीं गुरूद्वारों में विशेष शबद कीर्तन व अखंड पाठ का आयोजन किया गया व लंगर बरपा गया।

बैशाखी का पर्व यहां धूमधाम से पारंपरिक तरीके से मनाया गया। इस मौके पर लोगों ने घरों में विशेष पूजा अर्चना की। वहीं दूसरी ओर गुरूद्वारों में बैशाखी का पर्व धूमधाम से मनाया गया। आज के ही दिन सिखों के दसवें गुरू गोविंद सिंह ने खालसा पंत की स्थापना की थी व हिंदू धर्म की रक्षा के लिए पंच प्यारों का चुनाव किया था। लंढौर गुरू सिंह सभा, एवं लाइब्रेरी गुरूद्वारा साहिब ट्रस्ट में बैशाखी के पर्व पर ध्वजारोहण किया गया व गुरूद्वारों में शबद कीर्तन, अखंड भोग व पाठ के साथ ही अरदास की गई व उसके बाद लंगर का आयोजन किया गया। वहीं दूसरी ओर मसूरी के आस पास के गांवों में बैशाखी का पर्व धूमधाम से मनाया गया यह पर्व कृषि की समृद्धि के लिए मनाया जाता है क्यों कि रवि की फसल तैयार हो गई है। इस मौके पर गांवों में ग्राम देवता, कुल देवता व देवी सहित अन्य देवी देवताओं की पूजा अर्चना की जाती है तथा देवताओं की डोली को मंदिर से बाहर निकाल कर गांव के प्रत्येक घर के आंगन में ले जाया जाता है ताकि परिवारों पर कृपा बनी रहे। बैशाख के महीने में गांव गांव में बिस्सू, थौलू का आयोजन किया जाता है जिसमें पारंपरिक वाद्ययंत्रों के साथ देवी देवताओं की डोली को नचाया जाता है। इस मौके पर विशेष पकवान स्वालें पकोड़े, पापड़ी आदि बनाई जाती है व मेहमानों को परोसी जाती है। वहीं चैत्र माह का अंतिम दिन होने के कारण पूरे माह पहाड़ों में बच्चे जो घरों की देहली व चैंरी को फूलों से पूजते हैं उसका समापन भी आज के ही दिन होता है इस दिन लोग बच्चों को विशेष भोजन परोसते हैं व कपडे, पैसा आदि देते हैं। वहीं गांव में बच्चे ठेस्या देवता की पूजा गांव के समीप करते हैं व वहां भी पकवान बना कर ले जाते है जिसे पूजने के साथ ही पित्रों की भी पूजा की जाती है और उसके बाद ठेस्या देवता का पत्थरों से बना घर गिरा दिया जाता है।

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