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बिडंम्बना- बल्लियों के सहारे नदी पार करने को मजबूर हैं ग्रामीण

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जय प्रकाश बहुगुणा

बड़कोट : जहाँ आज देश में बुलेट ट्रेन चलाने की कवायद चल रही है वहीं उत्तरकाशी जनपद के सर बड़ियार क्षेत्र में लोगों को पुल न होने के कारण बल्लियों के सहारे नदी पार करनी पड़ रही है।इस आज हम आपकों आधुनिक भारत के कुछ ऐसे गाँवों से रूबरू करवाते हैं जो आज़ादी के 71 साल पूरे होने पर भी अपनी मूलभूत सुविधाओं जैसे शिक्षा स्वास्थ्य, सड़क व संचार आदि से वंचित हैं जी हां आपको बता दें कि उत्तरकाशी जिले के पुरोला तहसील एक ऐसा क्षेत्र जिसका नाम सरबड़ियार है । ये एक ऐसा क्षेत्र है जंहा स्वतंत्रता के बाद से आतजतक लोग अपनी मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रहे है ।इस क्षेत्र के ज्यादातर गाँवों के लिए आज तक न कोई सड़क बनी और न गांव को जोड़ने वाला कोई पुल, जमानों बीत गए लेकिन किसी भी जनप्रतिनिधि व अधिकारी ने इनकी ओर ध्यान देना तक जरूरी नहीं समझा ।पुल न होने से ग्रामीणों को नदी पार करने के लिए अस्थायी तौर पर पुल का निर्माण करते हैं जो बरसात के दौरान नदी के तेज बहाव के कारण पुल भी बह जाता हैं

ग्रामीणों और स्कूली बच्चों को बल्लियों का सहारा लेकर ही नदी को पार करना पड़ता हैं इससे स्थानीय ग्रामीणों की समस्या बढ़ जाती हैं हर रोज़ ग्रामीण व 150 तक स्कूली बच्चों को गाँव से पुरोला इंटर कॉलेज व राजगढ़ी तक आने में जर्जर संपर्क मार्ग से जंहा से लगातार पत्थर गिरने का भय के साथ ही लगभग सात किमी अतिरिक्त सफ़र तय करना पड़ता है जंगल से सटे होने के कारण जंगली जानवरों का भी भय बना रहता हैं ।
स्थानीय निवासी बताते हैं की अनेकों बार नदी पार करते हुए बच्चों व वृद्ध महिला के साथ दुर्घटना हो चुकी हैं जिसमें से कई लोगों अपनी जान भी गंवानी पड़ी है फिर भी विभाग ने इसकी सूझ लेना जरूरी नहीं समझा ।
क्या ऐसे में हम उमीद कर सकते हैं की हमारा देश कभी डिजिटल इंडिया बन पायेगा ।

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