Home अभी-अभी पूर्व पालिकाध्यक्ष ने कहा मसूरी की मालरोड बनी कस्बा, घंटाघर बना नासूर।

पूर्व पालिकाध्यक्ष ने कहा मसूरी की मालरोड बनी कस्बा, घंटाघर बना नासूर।

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बिजेंद्र पुंडीर

मसूरी। पूर्व पालिकाध्यक्ष ओ.पी उनियाल ने आरोप लगाया कि वर्तमान पालिका ने पूरे शहर व मालरोड को किसी गांव के कस्बे में तब्दील कर दिया है। वहीं लंढौर घंटाघर जनता की अपेक्षाओं के अनुरूप न बना कर मात्र खानापूर्ति की गई, जो जनता के लिए नासूर बन गया है।

पूर्व पालिकाध्यक्ष ओपी उनियाल ने कहा कि वर्तमान पालिका परिषद ने गत पांच सालों में पूरे मसूरी को स्लम बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। एक ओर बाहरी लोगों के कब्जे लगातार बढ़ रहे हैं वहीं मालरोड पर पूरी तरह कब्जा हो चुका है। कहीं कोई ऐसी जगह नहीं बची है जहां पर पर्यटक आराम से घूम सके। उन्होंने कहा कि वहीं मालरोड में पालतू जानवर गायों के साथ अब सांड भी खुले आम घूम रहे हैं जिससे कि लोगों को परेशानी हो रही है वहीं कुत्ते व बंदरो ने अलग परेशान कर रखा है। कई बार आवारा पशुओं के कारण लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है यहां तक कि कई लोगों को सांड मालरोड पर सींग मार कर चोटिल कर चुके हैं और अब लगातार सांडों की संख्या भी मालरोड पर बढ़ रही है। इसी तरह कुत्तों की संख्या बढ़ने से मालरोड पर पर्यटक आराम से घूम भी नहीं सकते, कूत्तों के झुंड के झुंड घूमते नजर आ जाते है जिन्हें देख कर मालरोड पर चलने वाले डर जाते हैं वहीं बंदरों का आतंक तो और भी ज्यादा है। इसी तरह मालरोड पर दूनवैली साइड में अतिक्रमण लगातार बढ़ रहा है लेकिन किसी को भी इसकी चिंता नहीं है जिसका प्रभाव पर्यटन पर पड़ रहा है। जिसके लिए उन्होंने पालिकाध्यक्ष व पालिका प्रशासन को जिम्मेदार माना है। उन्होंने कहा कि इससे मसूरी की छवि भी खराब हो रही है। वहीं दूसरी ओर इन दिनों मालरोड को निजी केबल कंपनी खोद रही है जिसके कारण हर रोज दुर्घटनाएं हो रही हैं जबकि यह कार्य जाड़ों में हो सकता था ऐसा लगता है कि इस शहर का कोई देखभाल वाला नहीं है।

वहीं दूसरी ओर उन्होंने लंढौर घंटाघर पर भी सवाल खड़े किए व कहा कि जब उन्होंने पुराने घंटाघर को तोड़ कर नया बनाने का प्रयास किया तो तब मामला हाई कोर्ट में भेज दिया गया कि इसके निर्माण में घपला हुआ है जबकि जब घंटाघर बना ही नहीं था तो घपला किस बात का और तब पालिका को मात्र 19 लाख खर्च करने थे बाकी पूरा पैसा उद्योगपति संजय नारंग को लगाना था जो घंटाघर को एक पर्यटक स्थल के रूप में विकसित करना था और यह लंदन के घंटाघर की तर्ज पर बनता इसके लिए लंदन से ही आर्किटेक्ट बुला लिए गये थे व घड़ी भी लंदन से मंगा ली गई थी। वहीं कहा कि तब इसे हाईकोर्ट में लटकाया गया लेकिन माननीय न्यायालय ने माना कि इसमें कोई गलत नहीं हुआ तो हाईकोर्ट ने ही पालिका को घंटाघर बनाने को कहा व साथ में निर्देश भी दिए कि घंटाघर संजय नारंग ही बनायेगा। लेकिन विवाद होने पर उन्होंने मना कर दिया और अब जो घंटाघर बनाया है वह करीब 80 लाख की लागत से बनाया गया है लेकिन अब कोई नहीं बोल रहा। उन्होंने यह भी कहा कि पहले जो घंटाघर बनना था उसके नीचे से वाहनों को आने जाने का रास्ता भी बनना था लेकिन जो अब बना उसके रास्ता नहीं दिया गया व इसके कारण यह घंटाघर समस्या बन गया है। पूर्व पालिकाध्यक्ष ओपी उनियाल ने यह भी कहा कि अब संभावना है कि घंटाघर को बेचने का प्लान भी बनाया जा रहा है तथा सुनने में आ रहा है कि इसके एक कैफे हाउस अपने चहेते को देने की योजना बनाई जा रही है। वहीं अब जो घंटाघर बना है वह साधारण बना है जो कि पर्यटको को आकर्षित नहीं कर सकेगा। इससे लंढौर के लोगों में आक्रोश है।

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