Home अभी-अभी पहाड़ों की रानी में मतदान कम होने से राजनैतिक दल चिंतित।

पहाड़ों की रानी में मतदान कम होने से राजनैतिक दल चिंतित।

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कपिल मलिक

मसूरी : लोकतंत्र के महापर्व पर पहाड़ों की रानी मसूरी में मतदान को लेकर खासा कोई उत्साह नजर नहीं आया। मतदान स्थल पर मतदाता, मतदान शुरू होने से पहले ही पहुंच गये थे। हालांकि शुरूआत में मतदान धीमा रहा लेकिन धीरे धीरे जैसे जैसे दिन बढ़ता गया, मतदाताओं की संख्या में कोई बढोत्तरी नजर नहीं आई।जबकि मतदान स्थलों पर कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई थी। मसूरी में मतदान लगभग 52 फीसदी रहा जो कि पिछले लोकसभा चुनाव से कम है।

पहाडों की रानी मसूरी में मतदान को लेकर लोगों में उत्साह नजर नहीं आया। सभी मतदान केंद्रो पर आराम से लोग वोट डालते रहे। कहीं किसी को कोई परेशानी नहीं रही। लेकिन इस बात से वहीं कई मतदाताओं के नाम लिस्ट में न होने से उन्हें निराश होना पड़ा जबकि जिन लोगों ने मतदान किया उनके चेहरों पर चमक देखी गई कि उन्होंने देश के विकास के लिए मतदान किया है।

लोकतंत्र के महापर्व में पहाड़ों की रानी मसूरी में पांच साल बाद होने वाले आम चुनाव में मतदाताओं में भारी उत्साह देखा जा रहा हैै। सुबह से ही मतदान स्थलों पर मतदाताओं की खासी संख्या देखी गई। जो लोग मतदान कर बाहर आ रहे थे उनके चेहरे पर विशेष खुशी नजर आ रही थी जबकि कई मतदाता ऐसे थे जिनका नाम मतदाता सूची में न होने पर उनके चेहरों पर निराशा व आक्रोश का भाव साफ झलक रहा था। मतदान स्थल पर कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई थी व मतदान स्थल के आसपास किसी को भी फटकने नहीं दिया जा रहा था। मतदाताओं के घरों से न निकलने पर राजनैतिक दलों के प्रतिनिधियों के चेहरों पर भी निराशा का भाव झलक रहा था कि आखिर मतदाता मतदान करने क्यों नहीं आ पा रहा है जबकि मसूरी का मौसम भी खुशगवार है।

  1. पहाड़ों की रानी मसूरी में बुर्जुगों व दिव्यांगों को मतदान स्थल तक पहुंचाने के लिए प्रशासन की ओर से कोई व्यवस्था नहीं की गई थी जबकि चुनाव आयोग का कहना है कि बुजुर्गों व दिव्यांगों को लाने ले जाने के लिए वाहनों व व्हील चियर आदि की व्यवस्था की गई है। लेकिन यहां ऐसा कुछ नजर नहीं आया। बुजुर्गों व दिव्यांगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। वहीं आरएन भार्गव इंटर कालेज बूथ पर एक दिव्यांग का कहना था कि वह मतदान करने पैदल आया है। लेकिन यहां देखा तो मतदाता सूची में नाम नहीं हैं। जबकि उसके पास मतदाता पहचान पत्र भी है।
  2. सभी बूथों पर लोग अपने नाम मतदाता सूची में नाम ढूढते रहे। लेकिन बहुत लोगों के नाम मतदाता सूची में नहीं मिले जबकि उन्हें एक दूसे बूथों में दौडाया गया। जिससे मतदाताओं में खासी निराशा रही। एक ओर जिनके नाम मतदाता सूची में हैं वह घर से बाहर नहीं निकले वहीं जो निकले तो उनके नाम न होने से वे मतदान नहीं कर पाये। वहीं दूसरी ओर बीएलओ के द्वारा मतदाताओं को घरों में वोटर पर्ची एवं नये मतदाताओं के कार्ड तक नहीं पहुचाये गये जिससे वह मतदान से वंचित रह गये। लोगों का कहना था कि बीएलओ ने कोई पर्ची नहीं दी जिस कारण वह मतदान नहीं कर पाये। वहीं कई युवा मतदाताओं ने अपने मत बनाने को तय समय से पहले कार्यालयों में जाकर जरूरी कागज व फार्म जमा करवायें लेकिन उनके नाम भी मतदाता सूची में नहीं आ पाये जिससे लगता है कि बीएलओ की लापरवाही इसकी जिम्मेदार है।
  3. आरएन भार्गव इंटर कालेज के मतदान केंद्र में एक घंटे तक एवीएम मशीन खराब रही। जिसके कारण मतदाताओं को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। हालांकि मतदान केंद्र में मौजूद अधिकारियों द्वारा लगातार मशीन को ठीक करने का प्रयास किया गया व करीब एक घंटे से भी अधिक समय तक मतदान नहीं हो पाया व बाद में जब मशीन ठीक हुई तक जाकर मतदान शुरू हो सका। वहीं दूसरी ओर मतदाताओं को जागरूक करने हेतु चुनाव आयोग के द्वारा पोलिंग बूथों पर जो मशीन का डेमो के पोस्टर लगाये गये जिसमें प्रत्याशियों में नाम तो नबंर के आधार पर दिखाये गये हैं लेकिन उसके नोटा के बटन की कोई जानकारी नहीं दर्शायी गई है। जिससे मतदाओं का कहना था कि इसमें नोटा क्यों नहीं दिखाया गया इस संबध में जब लोगों ने पत्रकारों को इस पोस्टर के बारे में जानकारी दी तो उनके द्वारा जब सेक्टर मजिस्ट्रेट से पूछा गया तो उन्होंने भी इस गलती को देखा व कहा कि इस संबध में निर्वाचन आयोग को अवगत कराया जायेगा।ताकि अन्य स्थानों पर होने वाले चुनाव में गलती का सुधार किया जा सके।
  4. मतदाताओं के वोट डालने न आने के कारण राजनैतिक दलों के बस्ते खाली खाली नजर आये। जिसके कारण राजनैतिक दलों के कार्यकर्ताओं के चेहरों से रौनक गायब नजर आयी। इसके चाहे भाजपा के कार्यकर्ता हो या कांग्रेस के या अन्य निर्दलीय प्रत्याशियों के कार्यकर्ता रहे हों सभी इस बात से हैरान थे। क्योंकि सरकार की ओर से जितना प्रचार प्रसार किया गया वह बहुत की कारगर साबित होना चाहिए था वहीं प्राइवेट लोगों ने भी कइ्र सुविधाएं मतदाताओं को देने की घोषणा की थी उसके बाबजूद भी लोग मतदान करने नहीं आयें।                                                                                                                                                                           

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