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पटरी से उतरती सूबे की प्राथमिक शिक्षा

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जय प्रकाश बहुगुणा

बड़कोट : उत्तराखण्ड में जहां एक ओर सरकार उच्च गुणवत्ता व रोजगार परक शिक्षा देने की बात करती है तो वही जो पहले से स्थापित सरकारी स्कूल है वहां अध्यापकों व संसाधनों की पूर्ति नही कर पा रहे हैं।ऐसे ही कई उदाहरण सीमान्त विकास खण्ड मोरी के है।जहाँ मानदंडों को दरकिनार कर सरकारी स्कूलों की ब्यवस्था विगाड़ने में सरकार लगी है।उत्तरकाशी जनपद के विकास खण्ड मोरी के चार राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालयों में छात्र संख्या 5 या 5 से कम है लेकिन यहां 3 से 2 शिक्षकों की तैनाती की गई है ।

छात्र अध्यापक का यह अनुपात किसी के गले नहीं उतर रहा है । दुर्गम विद्यालय जहां छात्र संख्या 40 या उससे अधिक है वहां एकल अध्यापक कार्यरत हैं तथा सुविधा जनक स्थानों पर छात्र संख्या 5 या इससे भी कम है वहां तीन शिक्षक तैनात किये गये है ।

शिक्षा विभाग के अधिकारियों की मनमानी और मिली भगत से छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ किये जाने का यह खेल बडे पैमाने पर खेला जा रहा है । इन विद्यालयों में पर ऐसे अध्यापक तैनात हैं जिनकी पहुंच उच्च अधिकारियों से लेकर सत्ता के गलियारों तक बताई जा रही है ।

विश्वस्त सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार मोरी ब्लाक के उच्च प्राथमिक विद्यालय में मोरा में 4 छात्र संख्या पर 3 शिक्षक, कुनारा राउप्रावि में 3छात्र को पढाने के लिए 2अध्यापक तक किराणू में 5छात्र पर 02 अध्यापक तथा कलीच में 05छात्र संख्या पर 02 शिक्षकों की तैनाती की गई है ।

जिससे साफ जाहिर होता है कि विभाग मानकों की धज्जियां उड़ा कर उंची पहुँच तथा अपने चहेते शिक्षकों को फायदा पहुंचाने के लिए कुछ भी कर सकता है । जानकारों के मुताबिक उच्च प्राथमिक विद्यालय में छात्र संख्या के आधार पर 37 छात्रों पर 1अध्यापक की नियुक्ति के मानक का नियम है ।

तथा उच्च प्राथमिक विद्यालय में कुल तीन सहायक तथा एक प्रधानाध्यक की तैनाती की नियमत व्यवस्था है। लगता है इसी व्यवस्था का लाभ उंची पहुंच के शिक्षक शिक्षा विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत कर उठा रहे है। इस संबंध में उप खण्ड शिक्षा अधिकारी का कहना है कि शिक्षकों का समायोजन जिला स्तर से होता है।यह उनके स्तर का मामला नहीं है वे तो केवल निरीक्षण कर सकते हैं ।मामला उनके संज्ञान में नहीं है ।

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