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दिल्ली में 15 अक्टूबर से 21 तक आयोजित स्वदेशी मेले में दिखेगी उत्तराखंड की झलक।

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कपिल मलिक

मसूरी : आगामी 15 अक्टूबर से 21 अक्टूबर तक दिल्ली में लगने वाले स्वदेशी मेले में उत्तराखंड का खाना परोसा जायेगा। जिसमें मसूरी के लंढौर बाजार के व्यवसायी पंकज कुमार अग्रवाल उत्तराखंड के भोज का प्रतिनिधित्व करेंगे। उन्होंने बताया कि उन्होंने इसकी पूरी तैयारी कर ली है। उत्तराखंडी स्टाल की विशेषता यह होगी कि दो हजार वर्ग फीट में उत्तराखंडी मकान का लुक दिया जायेगा जिसमें 14 खंबों की तिबार सहित पत्थरों की छत होगी। व उसमें मुंगरी टंगी होगी। उसमें जहां पहाड़ी भोजन परोसा जायेगा वहीं यहां की सांस्कृतिक विरासत, लोक संस्कृति, पहनावा, शिल्प, खानपान, वेशभूषा आदि भी देखने को मिलेगी।

पत्रकारों से बातचीत में हापुड़वालों की दुकान के स्वामी पंकज अग्रवाल ने बताया कि दिल्ली द्वारका में लगने वाले स्वदेशी मेले में उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत को लेकर जा रहे हैं। इस मेले में देश के 29 राज्यों की सांस्कृतिक विरासत देखने को मिलेगी। उन्होंने कहा कि मेले में उत्तराखंड के भोजन के साथ यहां का हस्तशिल्प, बर्तन, लोक संस्कृति, साहित्य, आभूषण, पहनावा, यहां के मसाले, वाद्ययंत्र, सहित करीब 35सौ उपयोगी वस्तुएं प्रदर्शित की जायेंगी। जहां तक खाने का सवाल है तो वहां पर तीन प्रकार की थाली परोसी जायेगी जिसमें नंदा थाली, महासू थाली व देवलगढ़ राजभोग थाली परोसी जायेगी अर्थात राजसी भोज  से लेकर सामान्य जन मानस का उत्तराखंडी भोज परोसा जायेगा। वहीं उत्तराखंडी मिठाई, अर्से, गुड की जलेबी, गुड झंगरियाल, पल्लर, मंडुवे की रोटी, मक्के की रोटी, कंडाली का साग, तोर की दाल, व पंचमढ़ी दाल, जिसमें हींग व जख्या का तड़का लगा होगा, लाल चावल, व कुमाउनी चटनी, मडुवे के समोसे व मोमो व उत्तराखंड में पैदा होने वाली सब्जी परोसी जायेगी। सभी खानों में तिल व चीलू का तेल प्रयोग किया जायेगा, वहीं गुड की चाय व शिलाजीत की चाय भी परोसी जायेगी। खाना जमीन पर बैठ कर कांसे की थाली व कटोरियों में परोसा जायेगा। स्टाल पर गढवाली वेशभूषा आंगड़ा घागरा में युवती भी खड़ी रहेगी तो पारंपरिक तरीके से खाना खाने वालों का स्वागत करेगी। उन्होंने बताया कि उनका उददेश्य पहाड़ी जीवन के तौर तरीकों को बताने के साथ ही सापेक्षिक संदेश देना भी है कि दिल्ली में रहने वाले 30 लाख उत्तराखंडी अपने प्रदेश में लौटे व प्रदेश सरकार के साथ सामंजस्य बिठा कर यहां की शिक्षा, स्वास्थ्य व रोजगार के क्षेत्र में कार्य करें ताकि पलायन हमेशा के लिए समाप्त हो जाय।

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