Home अभी-अभी दवा निर्माण में भारत विश्व में अग्रणी उद्योग, एक लाख चालीस हजार...

दवा निर्माण में भारत विश्व में अग्रणी उद्योग, एक लाख चालीस हजार करोड का व्यवसाय- रेडडी।

235
0
SHARE

कपिल मलिक

मसूरी : फैडरेशन ऑफ फार्मा इन्टरप्रिन्यूर की वार्षिक आम सभा में दवा कंपनियों के प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए ड्रªग कंट्रोलर जनरल इंडिया डा. ऐश्वरा रेडडी ने कहा कि भारत दवा के क्षेत्र में विश्व की अग्रणी उद्योग बन गया है तथा भारत से एक लाख 40 हजार करोड़ का व्यवसाय किया जा रहा है वहीं गुणवत्ता युक्त दवा के क्षेत्र में भी विश्वसनीय उद्योग बन गया है।

लाइब्रेरी स्थित एक होटल के सभागार में आयोजित फैडरेशन ऑफ फार्मा के वार्षिक सम्मेलन में बतौर मुख्य अतिथि ड्रग कंट्रोल जनरल इंडिया ऐश्वरा रेडडी ने कहा कि भारत दवा उद्योग के क्षेत्र में विश्व की विश्वसनीय उद्योग बन गया है। वहीं सरकार का लक्ष्य है कि आम आदमी को जीवन रक्षक दवाएं गुणवत्ता युक्त व सस्ते दाम पर मुहैया हो सके इसके लिए जन औषधि केंद्रों को हर शहर में खोला जा रहा है। उन्होंने  कहा कि दवा उद्योग की जो समस्यायें है उस पर कंपनियों के साथ बैठक कर वार्ता की जा रही है ताकि समस्याओं का समाधान हो सके। उन्होंने बताया कि आज भारत की दवाएं 190 देशों में जा रही हैं तथा एक लाख चालीस हजार करोड़ का व्यवसाय कर रही है। इसमें उत्तराखंड का बहुत बड़ा योगदान है क्यों कि यहां दवा उद्योग बहुत तेजी से आगे बढ़ा है तथा गुणवत्ता युक्त दवाएं बन रही हैं जिसकी पूरे विश्व में मांग है। उन्होंने बताया कि उत्तराखंड वर्तमान में देश की 20 प्रतिशत दवाओं की आपूर्ति कर रहा है तथा यहां पर विश्व स्वास्थ्य संगठन से करीब एक सौ से  अधिक कंपनियां मानक का प्रमाण पत्र हासिल किए है। उन्होंने कहा कि सरकार ने कई दवाओं के दाम तय किए है ताकि  आम आदमी को सस्ती व गुणवत्ता युक्त दवा मिल सके जिसमें टीबी, डायबिटीज, मलेरिया सहित कई दवायें हैं। एक दिन पूर्व ही एक डायबिटिक दवा लांच की गई है। जहां तक कैंसर की दवा का सवाल है उसमें भी दामों में काफी कमी की गई है।

इससे पूर्व ड्रग उद्योग उत्तरांखड के चैयरमैन आरके जैन ने कहा कि फार्मा उद्योग वर्तमान में बहुत बड़ा उद्योग बन गया है जिसमें आधुनिक तकनीकी के आने से क्रांति आ गई है तथा कई बड़े बदलाव आये हैं। आज भारत का यह  उद्योग विश्व के पैमाने पर फलफुल रहा है। वहीं उत्तराखंड व हिमाचल में यह काफी  तेजी से प्रगति कर रहा है। उन्होंने कहा कि हमारे यहां बन रही दवायें विश्व स्तरीय है। तथा वैश्विक स्तर पर बड़ा मार्केट बनाने में सफल हो रही है। उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से हम यह चाहते हैं कि दवाओं के रेट सरकार तय करे लेकिन इतना ध्यान रखे कि उद्योग में कार्यरत कर्मचारियों पर इसका असर न पडे़ इसके लिए सरकार को ऐसी नीति बनानी चाहिए जिसमें उद्योग की भी हानि न हो और रोगियों को गुणवत्ता युक्त सस्ती दवा उपलब्ध हो सके। हमारा यह प्रयास रहता है कि सरकार के साथ तालमेल बना कर उद्योग को आगे बढ़ाये। उन्होंने कहा कि उद्योग में सरकारी स्तर पर सहयोग की आवश्यकता है जिसके लिए ऐसे मौकों पर सरकार का ध्यान आकर्षित किया जाता है। इस मोके पर फैडरेशन के तकनीकि चेयरमैन विचनोद कलानू ने कहा कि तकनीकि के क्षेत्र में अभी कई कार्य करने की जरूरत है इसके लिए सरकार को नीति बनानी चाहिए क्यों कि दवाओं के निर्यात में भारत विश्व की अग्रणी कंपनियों में है जिसमें तकनीकि बढाने में सरकारी स्तर से प्रयास तेज किए जाने चाहिए। इस मौके पर सचिव अपराजिता ने कहा कि सरकार को इस ओर ध्यान देना चाहिए कि इस उद्योग को आगे बढ़ाने में सहयोग करे। इससे पूर्व बैठक में एसोसिएशन की उपलब्धियों के बारे में अवगत कराया गया। वहीं मुख्य अतिथि सहित अतिथियों का स्वागत किया गया। इस मोके पर ड्रग कंट्रोलर उत्तराखंड ताजवर सिंह, सतीश सिंगला, संजय सिन्हा, प्रमोद पलानी, अपराजिता, अशोक गोयल, नीरज भाटिया, एनएस भाटिया, अब्दुल मतीन, चेतन सोबती, संजीव गुप्ता,अनिल शर्मा, केशव सैनी, राकेश गुप्ता सहित बड़ी संख्या में दवा निर्माता मौजूद रहे।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here