Home अभी-अभी गिरासू भवनों की कब शासन प्रशासन सुध लेगा।

गिरासू भवनों की कब शासन प्रशासन सुध लेगा।

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बिजेंद्र पुंडीर

मसूरी : पहाड़ों की रानी मसूरी में हालांकि बरसात के मौसम में मैदानी क्षेत्रों की तरह बारिश का पानी भरकर नुकसान तो नहीं होता लेकिन पुराने गिरासू भवनों को लेकर चिंता बनी रहती है। मसूरी के कई ऐेसे भवन हैं जो जर्जर हो चुके हैं लेकिन आज तक उन पर न ही प्रशासन न ही नगर पालिका ने कोई कार्रवाई की। मात्र नोटिस देकर इतिश्री कर ली जाती है। वहीं दूसरी ओर इन गिरासू भवनों में रहने वाले लोगों की जान हमेशा खतरे में रहती है। ऐसे में कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा। बरसात समाप्त हो जाने के बाद सभी भूल जाते हैं और इस दिशा में कार्रवाई भी ठप्प हो जाती है। ऐसे मकानों में रहने वाले लोग भय के बीच जीने को मजबूर हैं। ऐसे में प्रशासन को कार्रवाई कर गिरासू भवनों में रहने वालों हटाकर उनकी व्यवस्था करनी चाहिए। जो सक्षम हैं उन्हें सुरक्षित स्थानों पर किराये पर मकान लेना चाहिए वहीं जो सक्षम नहीं है उनकी व्यवस्था प्रशासन को करनी चाहिए।

पहाड़ों की रानी मसूरी प्राकृतिक आपदा के मुहाने पर खड़ी है। बरसात में पुराने गिरासू भवन कभी भी किसी बड़ी दुर्घटना को जन्म दे सकते हैं वहीं भूकंप का क्षेत्र होने के कारण भी कभी भी ऐसे भवनों में बड़ा हादसा हो सकता है। ऐसे भवनों की पूरी जानकारी शासन प्रशासन के पास है, लेकिन कभी इस दिशा में गंभीरता नहीं दिखाई गई। मसूरी में अधिकतर भवन सौ साल से अधिक पुराने हैं जिनमें मरम्मत न होने के कारण जर्जर अवस्था में पहुंच चुके हैं। हर साल बरसात होने पर ऐसे भवनों में रहने वालों को नोटिस देकर प्रशासन व पालिका अपनी जिम्मेदारी से मुक्त हो जाता है। तथा किसी बड़ी दुर्घटना का इंतजार करता है। उत्तराखंड राज्य पहले ही आपदा ग्रस्त राज्यों में है और यहां पर आपदा से निपटने के लिए अलग से आपदा प्रबंधन एवं न्यूनीकरण विभाग का गठन किया गया। इससे लोगों को उम्मीद जगी थी कि यह आपदा के समय मदद करेगा व लोगों को सुविधा मिलेगी। लेकिन यह विभाग भी कोई खास नहीं कर पाया। उत्तराखंड सहित मसूरी में ऐसे गिरासू भवनों को लेकर सरकार के माध्यम से सर्वे कराया गया। जिसमें भयावह स्थिति नजर आई लेकिन आज तक इस दिशा में कोई कार्य न किया जाना विभाग की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान खड़ा करता है। वर्ष 2010 में मसूरी में आपदा प्रबंधन एवं न्यूनीकरण विभाग की एक बड़ी बैठक आयोजित की गई जिसमें संबंधित विभागों सहित शासन प्रशासन व पालिका के जिम्मेदार अधिकारियों सहित विशेषज्ञ शामिल हुए इसमें मसूरी पर तैयार की गई रिपोर्ट प्रस्तुत की गई। इस रिपोर्ट ने मसूरी वासियों के होश उड़ा दिए लेकिन इसके बाद भी कोई कार्रवाई न करना अधिकारियों की कार्य प्रणाली पर सवाल खडे़ करता है। और जनता को उसके हाल पर छोड़ दिया गया है। आपदा प्रबंधन एवं न्यूनीकरण विभाग द्वारा प्रस्तुत की गई इस रिपोर्ट में बताया गया कि मसूरी में 3344 भवन जर्जर र्ह जिसमें 615 भवन गिरासू हैं। इस रिपोर्ट में यह भी बताया गया था कि अगर भविष्य में कोई आपदा आती है तो इससे मसूरी में 240 करोड़ का नुकसान हो सकता है। इस दहला देने वाली रिपोर्ट आने के बाद लोगों को उम्मीद थी कि संबंधित विभाग इस दिशा में कोई ठोस उपाय करेगा ताकि जानमाल की हानि से बचाया जा सके। लेकिन इस रिपोर्ट को प्रसारित करने के बाद आलमारी में धूल फांकने के लिए रख दिया गया। अगर प्रशासन व पालिका समय समय पर ऐसे भवनों मे रहने वालों को चेताता व जगाता रहे तो इससे ऐसे भवनों में रहने वालों व मकान मालिकों में जागरूकता बनी रहेगी। लेकिन ऐसा नहीं हो पा रहा है। अधिकारी अपने दायित्वों का निर्वनहन करने में हीलाहवाली करते हैं अगर कभी कोई दुर्घटना घट जाये तो अधिकारी इसका जिम्मेदार अपने अधीनस्त को बता कर अपने को बचाने का प्रयास करते हैं। इन दिनों बरसात हो रही है और एक बार फिर गिरासू भवनों की ओर नजर जाती है वहीं इन भवनों में रहने वाले भी शायद रात को सो पाते हों लेकिन उसके बाद भी अपनी जान जोखिम में डाल कर मकान खाली करने को कोई तैयार नही होतां। इस बारे में जब नगर पालिका अधिशासी अधिकारी एमएल शाह से पूछा गया तो उन्होंने भी नोटिस देने की बात स्वीकारी कि ऐसे भवनों में रहने वालों को नोटिस दिया गया है। लेकिन सवाल उठता है कि अगर नोटिस देने के बाद भी मकान खाली नहीं कराया गया तो उसका जिम्मेदार कौन होगा। मसूरी में देखा जाय तो अधिकतर गिरासू भवन लंढौर बाजार क्षेत्र में हैं। लेकिन यहां समस्या ऐसी है कि इसका समाधान आसान नहीं हैं। इसके लिए कड़ी कशक्कत की जरूरत हैै। क्यों कि यहां पर अधिकतर भवन बहुमंजिला हैं जिसमें अधिकतर किरायेदार हैं जो मकान खाली नहीं करना चाहते। कुछ भवन ऐसे हैं जिसमें हर मंजिल का स्वामी अलग है ऐसे में मकान की मरम्मत करना भी टेढ़ी खीर साबित होती है। क्यों कि अगर एक मंजिल वाला तैयार है तो दूसरे वाला तैयार नहीं है, कहीं पूरा भवन एक स्वामी के पास है तो वहां पर किरायेदार आडे़ आ जाते हैं जो मकान खाली करने का तैयार नहीं है। ऐसे मंे समस्या का समाधान कैसे निकल पायेगा। बरसात के दिनों में मसूरी में कई ऐसी अवैध बस्तियां हैं जहां हर साल कोई न कोई आपदा आती है और उन्हें विस्थापित करना पड़ता है। कई ऐसे मकान है तो खतरे वाले स्थानों पर बने हैं। और पहले भी घटनाएं हो चुकी हैं लेकिन प्रशासन इस ओर ध्यान नहीं देने को तैयार है। जबकि बरसात के दिनों में लगातार भारी बारिश के कारण के कारण ऐसे स्थानों पर रहने वाले लोगों को हर समय खतरा बना रहता है। उसके बाबजूद भी लोग हटने को तैयार नहीं हैं। इस पर शासन प्रशासन, सहित तमाम सरकारी एजेंसियांे को गहनता से मंथन कर कोई न कोई रास्ता निकालना होगा ताकि वहां रहने वालों को बिना नुकसान किए हल निकल जाय व ये जर्जर भवन पुनः नये बनाये जा सकें।

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