Home अभी-अभी गडोली (बनाल) अस्पताल-जिसे खुद है उपचार की जरूरत

गडोली (बनाल) अस्पताल-जिसे खुद है उपचार की जरूरत

657
0

जय प्रकाश बहुगुणा

बडकोट : उत्तराखण्ड राज्य बने अब18वर्ष पूर्ण होने को है।लेकिन जिस अवधारणा को लेकर यहाँ के जन मानस ने इस राज्य निर्माण की आशा की थी ओ अभी तक कई क्षेत्रों में वेमानी लगता है।यहाँ के दुरस्त इलाकों में तत्कालीन उत्तरप्रदेश के समय से बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराने के लिए स्थापित किये गए अस्पतालों की हालत आज भी जस की तस बनी हुई है।ऐसा ही एक स्वास्थ्य केंद्र है राजकीय आयुर्वेदिक स्वास्थ्य केंद्र गडोली(बनाल) जिसके भरोसे ठकराल व बनाल पट्टी के पचास से अधिक गांवो के हजारों लोगों के स्वस्थ्य का जिम्मा है।लेकिन इस स्वस्थ्य केंद्र के भवन की जीर्ण शीर्ण हालत देखकर कोई मरीज तो क्या स्वस्थ आदमी को भी डर लगता है।यहाँ नियुक्त स्वास्थ्य कर्मी बमुश्किल जान जोखिम में डालकर किसी तरह अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं।
कहने को तो सरकार ने यहाँ दो फार्मशिस्ट-एक आयुर्वेदिक व एक एलोपैथिक की नियुक्ति कर रखी है।तथा एक दन्त रोग चिकित्सक ,एक वार्ड वाय, एक ए एन एम भी नियुक्त है।लेकिन अस्पताल में जिस चीज की सबसे ज्यादा जरूरत होती है सफाई ,सफाई कर्मी पिछले पांच सालों से नही है। दन्त चिकित्सक के पास किसी भी प्रकार का कोई उपकरण नही है।लगभग तीस साल पुराने बने इस स्वास्थ्य केंद्र का भवन व आवास आज जीर्ण शीर्ण हालात में है।भवनों के खिड़की दरवाजे बुरी तरह सड़ जाने के कारण क्षतिग्रस्त हो चुके हैं।सबसे जरूरी बिजली ब्यवस्था पिछले कई सालों से पूर्ण रूप से बन्द है।लेकिन बिभाग सुध लेने को राजी नहीं है।स्थानीय क्षेत्र पंचायत सदस्य प्रदीप गैरोला व दिव्यांग संघटन के प्रदेश सलाहकार बोर्ड के सदस्य सुरेंद्र सिंह रावत बताते हैं कि इस स्वास्थ्य केंद्र की बदहाली के बारे में कई बार सम्बन्धित बिभाग व शासन को लिखित रूप से अवगत कराया गया है लेकिन अभी तक किसी प्रकार की सुनवाई नही हुई।स्वास्थ्य केंद्र में चार दिवारी न होने के कारण यहाँ पशु भी डेरा डाले रहते हैं।क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों का कहना है कि यदि सरकार शीघ्र ही गडोली स्वास्थ्य केंद्र की सुध नहीं लेती है तो ग्रामीणों को धरना प्रदर्शन व आंदोलन करने को बाध्य होना पड़ेगा।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here