Home अभी-अभी खुले आसमान के नीचे पढ़ने को मजबूर नौनिहाल

खुले आसमान के नीचे पढ़ने को मजबूर नौनिहाल

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जय प्रकाश बहुगुणा

बडकोट : उत्तराखंड राज्य को बने हुए अब अठारह साल पूरे हो गए हैं।और अपने देश में अठारह वर्ष की उम्र वयस्क होने के लिए जानी जाती है।अठारह वर्ष की उम्र में आप हम अपनी गांव से लेकर देश तक की सरकार चुनने के लिए जिम्मेदार हो जाते हैं।लेकिन जिस सरकार को हम चुनते हैं ओ हमारे प्रति कितना जिम्मेदारी से अपना कर्तब्य निर्वहन करती है इसका एक वाकया सीमान्त विकास खण्ड मोरी के ओसला गांव में देखने को मिलता है।जनपद उत्तरकाशी के विकास खण्ड मोरी के सीमांत गाँव ओसला में स्कूल भवन विगत कई वर्षों से निर्माणाधीन होने से खुले आसमान के नीचे सन्चालित हो रहा है। यहाँ कई माह से स्कूल भवन निर्माण कार्य अधर में लटका हुआ है।

स्कूल भवन निर्माण अधर में होने का कारण यह बताया जा रहा है  कि जिस लागत से मैदानों में स्कूल भवनों का निर्माण किया जाता है उसी लागत पर यातायात विहीन सुदूवर्ती और सीमांत गाँवों में भी किया जाना होता है जो कि सम्भव नहीं है।

यदि हम सड़क मार्ग तालुका से ओसला तक खच्चर ढूलान की बात करें तो ओसला गाँव तक एक खच्चर का भाडा 600 रूपये है।जिससे निर्माण लागत का अनुमान लगाया जा सकता है ।

लेकिन कब तक नौनिहालो को सरकार की ढुलमुल नीति का खामियाजा भुगतना पडेगा । पहाड़ की विषम भौगोलिक परिस्थितियों के लिए मैदान के एसी रूम  में बैठकर नीति नियोजन बनाने से पहाड़ का यही हाल होना है।एक तरफ तो सरकार समय समय पर बिभिन अभियान चलाकर सबको शिक्षा देने की बात करती है वहीं दूसरी ओर राज्य बनने के अठारह साल बीतने के बाद भी इस पहाड़ी राज्य में पहाड़ व मैदान के लिए कोई ठोस नीति नही बना पाई है।सरकार कांग्रेस की हो या भाजपा की अठारह वर्षों में किसी भी दल की सरकार ने इस राज्य की वास्तविक समस्याओ के अनुरूप नीति बनाने का काम नही किया है।

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