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उत्तराखंड के अनछुए प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर चित्रों की प्रदर्शनी देख पर्यटक रोमांचित।

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कपिल मलिक

मसूरी : मालरोड स्थित गढवाल टैरेस के सभागार में उत्तराखंड पर्यटन से संबंधित चित्र प्रदर्शनी पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बनी है। यहां के प्राकृतिक सौंदर्य, लोक संस्कृति, ताल, धार्मिक स्थल, सरोवर, एअर एडवेंचर, लैंड एडवेंचर, वाटर स्पोर्टस, पक्षी, फूल, ऐतिहासिक स्थल, वन्यजीव, हिमनद, हिम ऋंखला, गांव, आदि में हृदय स्पर्शी चित्र आदि देख अभीभूत हो रहे हैं।

गढवाल टैरेस पर पर्यटन विभाग के सेवानिवृत्त अधिकारी एमआई खान ने उत्तराखंड पर्यटन नाम से प्रदर्शनी लगाई है। जिसे देख पर्यटक खासे उत्साहित हैं। प्रर्दशनी में उत्तराखंड के हिमनदों, सरोवरो, तालबों, ताल, बुग्याल, कुंड, लोक संस्कृति, धार्मिक स्थल, जिसमें चारों धाम के अलावा पंच बद्री, पंच केदार, पंच प्रयाग, हेमकुंड, पिरान कलियर, जागेश्वर धाम, मंदिर समूह, यहां के पक्षी, पुष्प, पेंडों, सहित साहसिक पर्यटन से जुडे एअर एंडवेंचर, वाटर ऐडवेंचर, लैंड एडवेंचर, गांवों सहित ऐसे अनछुए प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर स्थलों, हिमश्रृंखला, हिमनद आदि के अद्भुत चित्र देख मन रोमांचित हो रहे हैं। इस संबंध में प्रदर्शनी के संचालक एमआई खान ने बताया कि उत्तरांखड वास्तव में स्वर्ग है जिसे पहचानने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि यहां कई ऐसे प्राकृतिक व मन को रोमांचित करने वाले स्थल हैं जिनका आज तक प्रचार प्रसार नहीं है केवल चार धाम व मसूरी नैनीताल के अलावा किसी को अधिक कुछ पता नहीं है जबकि असली सौदर्य पहाड़ों पर छिपा है। जिसे देख ऐसा कोई प्रकृति प्रेमी नहीं होगा जिसका मन उद्वेलित न हो। उन्होंने बताया कि हिमालय की जितनी बड़ी ऋंखला यहां से दिखाई देती है ऐसी पूरे विश्व में कहीं नहीं हैं। फूलों की घाटी से भी अधिक सुंदर फूलों की कई घाटियां है लेकिन प्रचार प्रसार न होने के कारण वहां कोई नहीं जा पाता। कई मंदिर व मकान ऐसे है जिन्हें देख वास्तुविद भी आश्चर्य चकित रह जायं। उनका मकसद यह है कि प्रकृति प्रेमी इन स्थलों पर जायें व प्रकृति का वास्तव में आनंद लें इसमें रोजगार की भी अपार संभावनाएं हैं। उन्होंने कहा कि इस प्रदर्शनी में गढवाल मंडल विकास निगम व उत्तराखंड संस्कृति विभाग का सहयोग है। इस  मौके पर भाजपा मंडल अध्यक्ष मोहन पेटवाल ने कहा कि वास्तव में जो चित्र यहां आकर देखे मन को अपार शांति मिली व सरकार से आग्रह है कि वह प्रकृति के इन अनछुए स्थलों को प्रचार प्रसार करें ताकि इसका आनंद प्रकृति प्रेमी ले सकें। उन्होंने खान साहब के प्रयासों की सराहना की व कहा कि इससे निश्चित ही आने वाले समय में उत्तरांखड को लाभ मिलेगा।

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