Home अभी-अभी अंजुमन हैदरी समिति ने मुहर्रम पर मातमी जुलूस व ताजिया निकाला।

अंजुमन हैदरी समिति ने मुहर्रम पर मातमी जुलूस व ताजिया निकाला।

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कपिल मलिक

मसूरी : अंजुमन हैदरी समिति झड़ीपानी मसूरी के मुस्लिम शिया समुदाय के लोगों ने इमाम हुसैन की याद में चार दशक बाद मुहर्रम का मातमी जुलूस ताजिए के साथ निकाला व छाती पीट कर अपने धर्म के अनुसार शहीदों को याद किया। इस मौके पर मौलाना फिरोज मेंहदी ने कहा कि उनका धर्म अमन पसंद है तथा आतंकवाद का विरोध करता है।

झड़ीपानी कमल काटेज से निकाली गई मुहर्रम मातमी जुलूस में बड़ी संख्या में शिया मुस्लिम समाज के पुरूष व महिलाएं एकत्र हुई पहले मौलवी फिरोज मेंहदी ने अपने धर्मानुसार एकत्र समुदाय को इमाम हुसैन के परिवार की करबला में हुई कुर्बानी के बारे में बताया तो पूरा समाज गमगीन हो गया व भावुक होकर हर किसी के आंख में आंसू आ गये इसके बाद मातमी जुलूस निकाला गया।  में अंजुमने हैदरी संस्था के बैनर तले  जुलूस निकाल इम्माम हुसैन और कर्बला के शहीदों को याद किया। इस मौके पर मौलवी फिरोज मेंहदी ने बताया कि मुस्लिम समाज आतंकवाद के खिलाफ है। तथा अमन व शांति का समर्थक है। यह मातम इमाम सैयद की याद में मनाते हैं। करबला के मैदान में उनके नवासे व महिलाओं को जालिम राजा ने मार दिया गया था। उन्होंने कहा कि जहां भी दुनिया में जुल्म होता है वह उसके खिलाफ एहतजाज करते है, गांधी जी ने भी अंहिंसा की प्रेरणा व सीख इसी से ली किसी भी जालिम की हकूमत बर्दास्त नहीं करते। किसी को बचाने में अपनी जान दे देंगे लेकिन किसी की जान नहीं लेते। इज्जत की मौत से जिल्लत की जिंदगी बेकार है। इस मौके पर अंजुमन हैदरी समिति के जाकिर हुसैन ने कहा कि लंबे समय बाद मुहर्रम पर ताजिया निकाला गया। जिसमें मसूरी के शिया समुदाय के लोग आये। यह आयोजन लंबे समय बाद करने का प्रयास किया गया है ताकि आने वाली पीढ़ी अपने धर्म के बारे में जान सकें व समाज को अमन का संदेश दे सकें। इस मौके पर यूसुफ हुसैन, मोमीन हसन, जावेद अली, जामिन अली, अफवाक हुसैन, मुख्तार हुसैन जुल्फकार, अनवर हुसैन, सहित  बड़ी संख्या में महिलाए भी मौजूद रही।

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