Home Uncategorized उल्लू तो आपने बहुत देखें होंगे पर कहीं देखा है ऐसा उल्लू

उल्लू तो आपने बहुत देखें होंगे पर कहीं देखा है ऐसा उल्लू

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अरविंद सेमवाल

देहरादून : देहरादून में प्रेस क्लब का नजारा आम दिनों के मुकाबले बदला हुआ था। कारण था एक उल्लू। आपने कई बार अलग अलग तरह के चीजों के बारे में सुना होगा और देखा भी होगा कि जो अक्सर आम लोगों के बीच चर्चा का विषय बन जाते है। ऐसा ही कुछ देखने को मिला आज सुबह देहरादून स्थित प्रेस क्लब में। जी हां दरसअल जिस प्रेस क्लब में अक्सर खबरे होती हैं वही प्रेस क्लब चर्चा का विषय तब बन गया जब यहाँ सुबह से ही एक उल्लू ने अपना डेरा बना दिया। जिसे देखने के लिए तमाम मीडियाकर्मियों का जमावड़ा लग गया और साथ ही शुरू हो गई इस उल्लू पर चर्चा ।

दरसअल उल्लू पर चर्चा होना इसलिए खास था क्योंकि ये एक निहायती अलग किस्म का पक्षी नजर आ रहा था। अक्सर आपने और हमने काले उल्लू देखे होंगे लेकिन ये उल्लू एकदम सफेद रंग का था जो कि दुर्लभ प्रतीत हो रहा था। यही कारण था कि यह उल्लू सभी लोगो के बीच दिनभर चर्चा का विषय बना रहा। फिलहाल इस उल्लू की प्रजाति के बारे में तो सही जानकारी कोई जीव विशेषज्ञ ही दे सकते है। प्रेस क्लब में यह भी चर्चायें थी कि नवरात्रि के पहले दिन इस तरह उल्लू का दिखना वाकई शुभ संकेत होता है ।

उल्लू कितना शुभ कितना अशुभ? कुछ लोग उल्लू को शुभ मानते हैं तो कुछ अशुभ?

उल्लू को लेकर हमारे लोकजीवन में कई प्रकार की अजीब धारणाएं, मान्यताएं एवं अंधविश्वास प्रचलित हैं। जिनमें से कुछ आपके सामने रखे गए हैं। उल्लू को लगभग प्रत्येक भारतीय परिवार से शुभ-अशुभ के दायरे में समेट कर रखा गया है। कुछ लोग उल्लू को शुभ मानते हैं तो कुछ अशुभ। ‘उल्लू’ की उपमा हमारे समाज में अक्सर मूर्ख लोगों को ही दी जाती है लेकिन प्राचीन यूनानी कथाओं में इसे एक बुद्धिमान प्राणी बताया गया है।

उल्लुओं की विभिन्न प्रजातियों पर लम्बा शोधकार्य कर चुके रूस के शोधकर्त्ता डा. रॉरूयर्सन विक्टर का कहना है कि उल्लू एक मक्कार किस्म का पक्षी है जो दिन के उजाले में भी स्पष्ट देख सकता है लेकिन आलसी प्रवृत्ति का होने के कारण यह दिन में सोने का ढोंग करता है परन्तु जब इसे भूख सताती है तो यह दिन में भी बड़ी आसानी से शिकार कर लेता है। प्राचीन काल में मौसम का हाल जानने के लिए भी उल्लुओं का उपयोग किया जाता था।

उल्लू की आवाज सुनना मंगलकारी माना गया
उल्लू की कुछ प्रजातियां अपने सिर को पूरे 360 डिग्री तक घुमाने में सक्षम होती हैं। उल्लू उड़ते समय किसी गर्भवती महिला को छूते हुए गुजर जाए तो इसे महिला को पुत्री होने का संकेत माना जाता है। यदि उल्लू उड़ते समय किसी गंभीर रोगी को छूकर गुजर जाए तो इसका अर्थ है कि वह रोगी बहुत जल्द ठीक हो जाएगा। यदि रात्रि को उल्लू के दर्शन हो जाएं तो इसका अर्थ है कि धन का नुक्सान होने वाला है लेकिन प्रातरूकाल उल्लू की आवाज सुनना मंगलकारी माना गया है। यदि किसी के आंगन में उल्लू मरा हुआ मिले तो यह उस घर में पारिवारिक कलह का सूचक है और यदि किसी विशेष स्थान पर उल्लू नियमित रूप से आने लगे तो इसे किसी भयानक व दुखदायी घटना का सूचक माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि प्रातरूकाल पूर्व दिशा में वृक्ष पर बैठे उल्लू को देखने अथवा उसकी आवाज सुनने से धन की प्राप्ति होती है। उत्तर दिशा में बैठे उल्लू की आवाज सुनने वाले व्यक्ति को कोई गंभीर बीमारी होने का खतरा है। प्रातरूकाल दक्षिण दिशा में बैठे उल्लू को देखने या उसकी आवाज सुनने से उस व्यक्ति के शत्रुओं का नाश होता है। सुबह के समय पश्चिम दिशा में बैठे उल्लू की आवाज सुनने वाले व्यक्ति को धन का भारी घाटा होता है।

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