Home अभी-अभी रेशमा शाह के गीतों पर जमकर थिरके लोग।

रेशमा शाह के गीतों पर जमकर थिरके लोग।

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कपिल मलिक

मसूरी : विंटर लाइन कार्निवाल के तहत मालरोड लोक संस्कृति में रंगी रही। गढवाल टैरेस पर जहां उत्तराखंड की स्वर कोकिला रेशमा शाह ने अपने गीतों पर पर्यटकों सहित स्थानीय लोगों को नाचने पर मजबूर किया वहीं शहीद स्थल पर राजकीय प्राथमिक विद्यालय के नन्न्हे बच्चों ने लोकनृत्य की प्रस्तुति देकर यह बताने का प्रयास किया कि अब वह इस सांस्कृतिक विरासत के वाहक हैं।

गढवाल टैरेस पर लोक गायिका रेशमा शाह का जलवा रहा। दैणा होंया खोली का गणेश व महासू देवता के जागर के साथ कार्यक्रम का शुभांरंभ करने के बाद रेशमा शाह ने एक से बढकर एक जौनसारी व जौनपुरी गीतों की प्रस्तुति दी तो स्रोता नाचने को मजबूर हो गये। उन्होंने ले भूजी जाला चूड़ा, अगलाड़ की माछी सहित अनेक गीत गाये वहीं साथ में आये कलाकारों ने मनमोहक नृत्य की प्रस्तुति दी। वहीं एक गाने में नृत्य के साथ सिर पर चाय बनाने का हृदयस्पर्शी नृत्य की प्रस्तुति दी।

वहीं दूसरी ओर शहीद स्थल पर राजकीय प्राथमिक विद्यालय गैड के नन्हे मुन्ने छा़त्र छात्राओं ने जौनपुरी लोकनृत्य प्रस्तुत कर समां बांधा। बच्चों का नृत्य देख व उनकी सघी कला से ऐसा लग रहा था मानों ये बच्चे पेशेवर कलाकार हों। उनके नृत्य की दर्शकों ने जमकर सराहना की। वहीं जौनपुर के अन्य कलाकारों ने विलुप्त होती पांडवनृत्य की मनमोहक प्रस्तुति दी वहीं क्षेत्र के बुजुर्गो ने संराई नृत्य की प्रस्तुति देकर सभी का दिल जीता। संराई नृत्य युद्ध के समय किया जाने वाला पौराणिक नृत्य है जो अब लगभग विलुप्त हो गया है।

वहीं दूसरी ओर गढवाल टैरेस पर सुरमणि सिंतार वादक अग्नि वर्मा ने सितार वादन की मनमोहक प्रस्तुति दी व लोगों को झूमने पर मजबूर किया। उन्होंने विभिन्न रागों के साथ हिंदी गानों को सितार पर बजाया। वहीं बॉलीवुड गायक प्रज्युल जोशी ने भी गढवाल टैरेस पर अपने बैंड के साथ प्रस्तुति दी। व कई फिल्मों के गाने गाकर स्रोताओं को झूमने पर मजबूर किया। इस मौके पर पुणे से आई पर्यटक रेनू ने कहा कि वह कार्निवाल का पूरा आनंद ले रही हैं उन्हेांने गढवाली भोजन का आनंद लिया व पहली बार खाया उन्होंने कहा कि यह आर्गेनिक होने के साथ ही अलग स्वाद का आनंद देता है इसको बढावा दिया जाना चाहिए व होटलों रेस्टोरेंटो में मेन्यू में शामिल किया जाना चाहिए ताकि जब भी कोई गढवाली खाना मागें तो उसे आसानी से मिल जाय। दिल्ली से आई पर्यटक रंजना श्रीवास्तव ने कहा कि कार्निवाल के समय आकर उनके घूमने का आनंद दो गुना हो गया सबसे पहले तो यहाँ अच्छी खासी धूप का आनंद ले रहे हैं जबकि दिल्ली में कोहरा है वहीं यहां पर गढवाल की लोक सस्कृति देखने को मिली जो बहुत ही सुंदर है। इसका प्रचार प्रसार पूरे देश में होना चाहिए क्यो कि अपनी लोक संस्कृति का अलग ही मजा होता है तथा पर्यटकों को इसका अलग आनंद मिलता है।

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