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आखिर 30 नवम्बर पहाड़ों की रानी मसूरी और देहरादून के लिए क्यूँ है खास — पढ़ें खबर

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बिजेंद्र पुंडीर

मसूरी : पहाड़ो की रानी मसूरी को बसाने वाले जनरल फ्रेड्रिक यंग को आज भुला दिया गया है। उनके नाम पर आज तक शहर में ऐसा कोई भी संस्थान, स्मारक या प्रतिष्ठान है जिससे उन्हें याद किया जा सके। जबकि उन्होंने मसूरी को बसाने के साथ ही यहां के विकास में अहम योगदान दिया व मसूरी में पालिका गठन में भी अहम योगदान दिया। उनके नाम देश में अनेक उपलब्धियां हैं जिस पर मसूरी वासियों को गर्व होना चाहिए। लेकिन यह दुर्भाग्य ही है कि मसूरी को बसाने वाले को ही भुला दिया गया है, कभी भी उन्हें याद नहीं किया जाता चाहे उनका जन्म दिवस हो या निर्वाण दिवस हो।

30 नंवंबर का दिन मसूरी के इतिहास का स्वर्णिम दिन है। पहाड़ों की रानी मसूरी को बसाने वाले तत्कालीन कैप्टन फे्रड्रिक यंग को आज भुला दिया गया है। उन्होंने इस शहर को बसाने के साथ ही यहां वो सारी सुविधाएं उपलब्ध कराने में योगदान  दिया जो उस समय इंग्लैड में होती थी। यहीं कारण है कि मसूरी उस समय विश्व के सात प्रमुख शहरों में जाना जाता था। फे्रड्रिक यंग का जन्म आयर लैंड में 30 नवंबर सन 1786 में हुआ था तथा वह 18 वर्ष की आयु में ब्रिटिश सेना में भर्ती होकर भारत आ गये थे। उन्होंने ब्रिटिश सरकार के साम्राज्य को फैलाने में अहम भूमिका निभाई। उन्होंने कई भारतीय रियासतों को जीता व दक्षिण भारत में टीपू सुल्तान से युद्ध कर उन्हें भी पराजित किया था। उनका स्थानातंरण देहरादून किया गया व यहां पर उस समय 1814 में टिहरी नरेश व गोरखाओं का युद्ध चल रहा था जिसमें गोरखाओं ने पूरे राज्य में आतंक मचा रखा था तब टिहरी महाराज ने अंग्रेजी सेना की मदद मांगी जिस पर अंग्रेजी सेना ने टिहरी राजा की मदद की व खलिंगा जैसे मजबूत किले को गोरखाओं से अपने कब्जे में ले लिया था यह युद्ध करीब सवा से डेढ माह तक चला पहले चरण कें इस युद्ध में अंग्रेजी सेना के कई अधिकारी मारे गये जिसमें जनरल ग्लेप्सी भी थे। फिर उन्होंने पूरे देश से सेना एकत्र की, जिसमें सहारनपुर, लुधियाना, गोरख पुर आदि से सेना आयी व दुबारा खलिगा के अभेद किले पर आक्रमण किया जिसमे अंग्रेजों ने 18 पाउंड के गोले तोप से दागे जिससे किला तोड़ा गया। गोले को आधा भाग आज भी मेरे पास मौजूद है। गोरखाओं से युद्ध का समापन भी 30 नवंबर को हुआ था। गोरखाओं के यहां से हिमाचल जाने पर टिहरी राजशाही के टिहरी महाराज ने आधा राज्य अंग्रेजो को दे दिया था। इसके बाद भी यंग हिमाचल में गोरखाओं से लोहा लेते रहे। उन्होंने देखा कि गोरखा साहसी व वीर है तो उन्होंने पहले सिरमोर रेजीमंेट का गठन किया व उसके बाद गोरखाओं को अपना बनाया व उनकी रेजीमेंट खड़ी की जिसकी बदौलत अंग्रेजो ने पूरे देश की रियासतों पर अपना अधिकार किया। और आज विश्व की कई सेनाओं में गोरखा शामिल हैं। इतिहासकार गोपाल भारद्वाज ने बताया कि जनरल यंग तब केप्टन थे उन्होंने भी इस युद्ध में भाग लिया और उसके बाद मसूरी को बसाने का कार्य किया। तब मसूरी के जंगलों में शिकार खेलने आते थे तो उन्हें यह जगह इंग्लैंड की तरह लगी व यहां की आबोहवा भी वहां की तरह लगी जिस पर उन्होंने मसूरी को बसाना शुरू किया। यहाँ मूल भूत सुविधाओं का विकास किया। व यहां की नगर पालिका के गठन में भी अहम योगदान दिया। उन्हे ब्रिटिश सरकार ने कई अहम पदों पर रखा व पुरस्कार दिए। यंग ने दार्जिलिंग का युद्ध भी जीता व वहां दार्जिलिंग शहर को भी बसाया।

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