Home अभी-अभी स्वास्थ्य सुविधाओं पर सरकार के दावे फेल।

स्वास्थ्य सुविधाओं पर सरकार के दावे फेल।

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सोनू उनियाल

चमोली : चमोली जिले में स्वास्थ्य सुविधाओं की सरकार के दावों की पोल तब खुलती है जब कोई गंभीर रूप से बीमार हो अथवा घायल और उन्हें हेली सेवा के माध्यम से जिले से बाहर हायर सेंटर ले जाना हो। ऐसा ही एक वाकिया गुरूवार को तब सामने आया जब विकास खंड घाट के उस्तोली निवासी प्रदीप सिंह रावत को गंभीर रूप से घायल होने की दशा में हायर सेंटर ले जाने के लिए परिजनों को काफी मसकत करनी पड़ी। बाद में स्वयं के खर्चे पर देहरादून से दो लाख रुपये में हेलीकाप्टर मंगा कर उसे देहरादून भेजा गया।
घटना के अनुसार प्रदीप सिंह उम्र 26 वर्ष पुत्र दिग्पाल सिंह निवासी घाट उस्तोली बुधवार की रात्रि को घाट बाजार से खाना खाने के बाद अपने कमरे पर सोने जा रहा था तो अचानक वह सीडियों से गिर गया। गंभीर चोट लगने के कारण वहां से उठ नहीं पाया और पूरी रात्रि वहीं पड़ा रहा। सुबह जब लोग इधर उधर जाने लगे तो तब किसी ने उसे देख कर उस्तोली के प्रधान महावीर सिंह रावत व पूर्व प्रधान मनोज रावत को इसकी जानकारी दी। जिसके बाद परिजनों ने आकर उसे सीएचसी घाट में भर्ती करवाया जहां चिकित्सकों ने उसकी गंभीर हालत को देखते हुए उसे जिला चिकित्सालय गोपेश्वर रेफर कर दिया। दोपहर में जब वह गोपेश्वर पहुंचे तो यहां भी चिकित्सकों ने उसकी स्थिति को देखते हुए उसे हायर सेंटर ले जाने की सलाह दी। जिस पर परिजनों ने शासन-प्रशासन व सरकार के विधायकों से हेलीकाप्टर की मांग की लेकिन कहीं से कोई सकारात्म जबाव नहीं मिला बाद में परिजनों के स्वयं के खर्चा उठाने की बात करने के बाद चमोली प्रशासन ने देहरादून से हेलीकाप्टर बुलाकर घायल को देहरादून भेजा है। उस्तोली निवासी कैलाश सिंह व महावीर सिंह का कहना है कि घायल को देहरादून ले जाने के लिए उनके ओर से शासन-प्रशासन से लेकर सरकार तक गुहार लगायी गई लेकिन सभी ने हामी तो भरी मगर किसी ने भी हेलीकाप्टर को नहीं मंगाया और ना ही भेजा गया। बाद में ग्रामीणों व परिजनों ने आपसी सहयोग से दो लाख रुपये में हेलीकाप्टर मंगा कर घायल को देहरादून रेफर किया है।

ऐसे में तो बिना इलाज के ही दम तोड़ देंगे गरीब गुरब्बे
शुक्र है कि गंभीर रूप से घायल प्रदीप सिंह रावत के परिजनों के साथ ही अन्य लोगों ने एनवक्त पर मदद कर दी नहीं तो अस्पताल में बिना चिकित्सक और धन के उसका क्या हाल होता भगवान ही जाने। घायल को आपातकालीन स्थिति में देहरादून ले जाने के लिए न सरकार व न प्रशासन ही सामने आया। तब भला ऐसे में क्या उम्मीद की जा सकती है कि कोई गरीब व्यक्ति गंभीर रूप से घायल अथवा बीमार हो जाए और उसे तत्काल हायर सेंटर देहरादून रेफर करना पड़े तो ऐसे हाल में तो वह बिना इलाज के ही दम तोड़ देगा।

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